राष्ट्रीय

नस्लीय अपशब्दों को घृणा अपराध की अलग श्रेणी मानने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

नस्लीय अपशब्दों (racial slur) को घृणा अपराध की एक अलग श्रेणी के रूप में मान्यता देने और उसके लिए सजा तय करने संबंधी व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि नए आपराधिक कानूनों में भारतीय नागरिकों, विशेषकर पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले लोगों के खिलाफ होने वाली नस्लीय हिंसा के मुद्दे को पर्याप्त रूप से संबोधित नहीं किया गया है।

यह याचिका उत्तराखंड में त्रिपुरा के 24 वर्षीय एमबीए छात्र अंजेल चकमा पर हुए हमले के बाद दायर की गई है, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है। घटना के समय अंजेल चकमा अपने छोटे भाई के साथ खरीदारी कर रहे थे, तभी कुछ लोगों ने उन्हें रोका और उनकी शारीरिक बनावट को लेकर नस्लीय अपशब्द कहे।

जब चकमा ने इस पर आपत्ति जताई, तो आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और चाकू से हमला किया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने हमले के दौरान चकमा के वे मार्मिक शब्द भी उद्धृत किए हैं, जो उन्होंने अपने हमलावरों से कहे थे—

“हम भारतीय हैं। यह साबित करने के लिए हमें कौन सा प्रमाण पत्र दिखाना चाहिए?”

गंभीर रूप से घायल अंजेल चकमा को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वे अंत तक होश में नहीं आ सके।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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