राष्ट्रीय
“नया साल, वही पुरानी मार: महंगाई ने फिर तोड़ी आम आदमी की कमर”

देश की आम जनता फिर महंगाई की मार झेल रही है।
नया साल आया, लेकिन रसोई का बजट पहले से ज़्यादा भारी हो गया है। दाल, सब्ज़ी, दूध और गैस—हर चीज़ के दाम चुपचाप बढ़ते जा रहे हैं। आम आदमी की कमाई वहीं की वहीं है, लेकिन खर्च रोज़ नया रिकॉर्ड बना रहा है।
सबसे ज़्यादा असर मध्यम और गरीब वर्ग पर दिख रहा है। लोग ज़रूरतों में कटौती कर रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई और इलाज तक पर समझौता करना पड़ रहा है। सवाल ये है कि क्या सिर्फ जनता ही एडजस्ट करेगी?
या फिर महंगाई पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
नया साल उम्मीद लेकर आया था,
लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी वही सवाल पूछ रही है—
“क्या राहत सिर्फ काग़ज़ों तक ही रहेगी?”



