कोगिलु में विस्थापितों के पुनर्वास को लेकर सरकार की तत्परता पर भाजपा विधायक का सवाल

भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री अरगा ज्ञानेंद्र, जो तिर्थहल्ली से विधायक हैं, ने बेंगलुरु के कोगिलु लेआउट में विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार की “अचानक दिखाई गई तत्परता” की आलोचना की है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि वह उन लोगों को राहत देने में अब तक क्यों विफल रही, जो छह दशक पहले शरावती परियोजना के कारण विस्थापित हुए थे।
3 जनवरी को शिवमोग्गा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में श्री ज्ञानेंद्र ने कहा कि 1960 के दशक में शरावती जलविद्युत परियोजना के लिए सैकड़ों परिवारों को विभिन्न स्थानों पर बसाया गया था।
उन्होंने कहा, “अब तक सरकार ने उन्हें उस ज़मीन का स्वामित्व नहीं दिया है, जिस पर वे पिछले छह दशकों से बसे हुए हैं। लेकिन कोगिलु में सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण करने वालों को मकान स्वीकृत किए जा रहे हैं। यह राज्य के मूल निवासियों के साथ अन्याय क्यों?”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण करने वाले लोग कन्नड़िगा नहीं बल्कि केरल से आए प्रवासी हैं।
“सरकार राजनीतिक कारणों से बाहरी लोगों को आश्रय दे रही है। केरल में होने वाले चुनावों को देखते हुए सरकार ने जल्दबाज़ी दिखाई। इसके अलावा, कोगिलु में बसे लोग एक ही समुदाय से हैं, जो सत्तारूढ़ दल का वोट बैंक हैं। जबकि शिवमोग्गा में शरावती परियोजना के कारण विस्थापित लोग कांग्रेस का वोट बैंक नहीं हैं,” उन्होंने कहा।
बल्लारी की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री ज्ञानेंद्र ने कहा कि झड़पों में एक निर्दोष मजदूर की मौत हो गई।
उन्होंने कहा, “मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि उसकी मौत कांग्रेस विधायक की फायरिंग से हुई। सरकार को तुरंत उस विधायक और उसके गनमैनों को गिरफ्तार करना चाहिए और शहर में शांति सुनिश्चित करनी चाहिए,” उन्होंने मांग की।



