राष्ट्रीय

ईरान से बिजनेस पर 25% टैरिफ से भारत पर क्या असर पड़ेगा?

मान लीजिए एक सुबह भारत के बाज़ार जागते हैं। अख़बारों की सुर्ख़ियों में एक ख़बर है—ईरान से होने वाले बिज़नेस पर अमेरिका ने 25% टैरिफ लगा दिया है। यह ख़बर सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि धीरे-धीरे भारत की अर्थव्यवस्था की गलियों में हलचल पैदा करने लगती है।

भारत और ईरान का रिश्ता बहुत पुराना है। तेल से लेकर चावल, दवाइयों और इंफ्रास्ट्रक्चर तक—दोनों देशों के बीच व्यापार की एक मज़बूत कड़ी है। जब ईरान पर 25% टैरिफ लगता है, तो इसका सीधा मतलब यह नहीं कि भारत पर टैक्स लग गया, बल्कि इसका असर एक चेन रिएक्शन की तरह होता है।

सबसे पहले बात आती है तेल की। ईरान भारत के लिए कभी बड़ा तेल सप्लायर रहा है। टैरिफ और पाबंदियों के कारण ईरान से तेल लेना महंगा और मुश्किल हो जाता है। भारत को फिर सऊदी अरब, रूस या दूसरे देशों की ओर देखना पड़ता है। वहां से तेल थोड़ा महंगा मिलता है, और जब तेल महंगा होता है तो ट्रांसपोर्ट, गैस, डीज़ल और रोज़मर्रा की चीज़ों के दाम धीरे-धीरे बढ़ने लगते हैं। आम आदमी को लगता है कि महंगाई चुपचाप उसकी जेब काट रही है।हालाँकि कहानी का एक दूसरा पहलू भी है। भारत हर बार हालात से सीखता है। ईरान पर टैरिफ का दबाव भारत को यह सोचने पर मजबूर करता है कि वह अपने ऊर्जा स्रोतों और व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाए। घरेलू रिफाइनरीज़ मज़बूत होती हैं, रिन्यूएबल एनर्जी पर ज़ोर बढ़ता है, और नए बाज़ार तलाशे जाते हैं। लंबे समय में यह भारत को और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में धकेल देता है।

तो कुल मिलाकर, ईरान से बिज़नेस पर 25% टैरिफ भारत के लिए एक झटका ज़रूर है—तेल महंगा होता है, निर्यातकों को परेशानी आती है, रणनीतिक प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ता है। लेकिन यही झटका भारत को अपनी चाल बदलने, नए रास्ते खोजने और भविष्य के लिए खुद को मज़बूत करने की सीख भी देता है।

saamyikhans

former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button