उत्‍तर प्रदेश

इलाहाबाद हाई-कोर्ट में नई नियुक्ति — न्यायिक व्यवस्था पर असर और चुनौतियाँ

इलाहाबाद उच्च न्यायालय में हाल ही में विनय (या विनाइ) कुमार द्विवेदी को न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलायी गयी है। यह नियुक्ति उच्च न्यायालय की सुनवाई-क्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों में कटौती करने के प्रयास के अंतर्गत देखी जा रही है। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालतों का बरोबर कार्यभार और समय पर सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक पदों का भरना आवश्यक है।

न्यायिक विशेषज्ञ मानते हैं कि जजों की संख्या बढ़ने से समाधान की गति में सुधार आएगा, पर साथ ही संसाधनों, न्यायालयीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और सहायक स्टाफ की कमी को भी पूरा करना होगा। अलग-अलग बेंचों में मामले आवंटित करने, केस-मैनेजमेंट सुधारने और डिजिटल सुनवाई के उपयोग को बढ़ाने जैसी रणनीतियाँ भी जरूरी होंगी ताकि वास्तविक लाभ जनता को मिले। कुछ विधिवेदों ने सुझाव दिया है कि केवल नियुक्ति-सूचना से अधिक जरूरी है प्रोसेस में पारदर्शिता और मामले निस्तारण की गुणवत्ता।

विश्लेषण: न्यायिक प्रणाली में क्षमता बढ़ाने का अर्थ केवल संख्या नहीं, बल्कि फैसला-गुणवत्ता तथा पहुंच में वृद्धि है

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/News Portal

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