
इंडिया-ए बनी एशिया की नई चैंपियन, बैंकॉक में बांग्लादेश को 46 रन से हराकर रचा इतिहास
नई दिल्ली: एशिया की उभरती सितारों की इस जंग में एक बार फिर तिरंगा सबसे ऊंचा लहराया। विमेंस एशिया कप राइजिंग स्टार्स 2026 का खिताब इंडिया-ए ने अपने नाम कर लिया है। बैंकॉक में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारतीय टीम ने बांग्लादेश को 46 रन से हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी पर कब्जा जमाया। रविवार की शाम भारतीय युवा खिलाड़ियों ने जिस आत्मविश्वास और संयम का प्रदर्शन किया, उसने यह साबित कर दिया कि भारतीय महिला क्रिकेट का भविष्य बेहद उज्ज्वल है।
मुश्किल शुरुआत, लेकिन हिम्मत नहीं हारी
टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंडिया-ए की शुरुआत अच्छी नहीं रही। टीम ने महज़ 44 रन के स्कोर पर 4 विकेट गंवा दिए। वृंदा दिनेश (19), नंदिनी कश्यप (8), अनुष्का शर्मा (8) और मिनू मणी (0) जल्दी पवेलियन लौट गईं। लेकिन संकट की इस घड़ी में तेजल हसबनीस और कप्तान राधा यादव ने जिम्मेदारी उठाई। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 69 रन की अहम साझेदारी कर टीम को संभाला। राधा यादव ने 30 गेंदों पर 36 रन बनाए, जिसमें 1 छक्का और 3 चौके शामिल थे। वहीं तेजल हसबनीस ने 34 गेंदों पर नाबाद 51 रन की शानदार पारी खेली — 2 छक्के और 3 चौकों के साथ। उनकी यह जुझारू पारी टीम के लिए मैच जिताऊ साबित हुई और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। इंडिया-ए ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 134 रन बनाए।
135 का लक्ष्य, लेकिन भारतीय गेंदबाज़ों का दबदबा
135 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी बांग्लादेश की टीम कभी भी मुकाबले में सहज नजर नहीं आई। विकेटकीपर शमिमा सुल्ताना (20), सरमिन सुल्ताना (18) और कप्तान फाहिमा खातून (14) ने कोशिश जरूर की, लेकिन टीम 19.1 ओवर में 88 रन पर सिमट गई। भारतीय गेंदबाज़ों ने अनुशासित प्रदर्शन किया। प्रेमा रावत ने 3 विकेट झटके, जबकि सोनिया मेंधिया और तनुजा कंवर ने 2-2 विकेट लिए। सायमा ठाकोर और मिनू मणी को 1-1 सफलता मिली।
लगातार दूसरी बार चैंपियन
यह इंडिया-ए का लगातार दूसरा खिताब है। इससे पहले 2023 में भी भारतीय टीम ने बांग्लादेश को हराकर ट्रॉफी जीती थी। उस टूर्नामेंट का पहला एडिशन हॉन्गकॉन्ग में खेला गया था।लगातार दो बार खिताब जीतना इस बात का संकेत है कि भारतीय महिला क्रिकेट की नई पीढ़ी आत्मविश्वास और हुनर से भरपूर है।
भविष्य के सितारों की चमक
इस जीत के साथ इंडिया-ए ने सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं जीती, बल्कि यह भी दिखा दिया कि भारतीय क्रिकेट की अगली पीढ़ी बड़े मंच के लिए पूरी तरह तैयार है। बैंकॉक की इस शाम ने एक बार फिर साबित कर दिया — जब जज्बा और मेहनत साथ हो, तो जीत सिर्फ एक नतीजा बन जाती है।



