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इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से क्या हुआ हासिल और किन वजहों से याद रखा जाएगा!

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट से क्या हुआ हासिल और किन वजहों से याद रखा जाएगा

पाँच दिन, 20 देशों के प्रमुख. दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के बीच बातचीत, और दिल्ली के बीचों-बीच लाखों लोगों का जमावड़ा. इस दौरान हर जगह दो शब्द सुनाई देते रहे: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस.

भारत सरकार के मुताबिक़, ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ अब तक का सबसे बड़ा एआई समिट था.

ब्रिटेन, साउथ कोरिया और फ्रांस में ये समिट होने के बाद, पहली बार ‘ग्लोबल साउथ’ के किसी देश में ये समिट हुआ.

21 फ़रवरी को 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने नई दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट डिक्लेरेशन का समर्थन किया. इनमें अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और यूरोपियन यूनियन शामिल हैं.

इस डिक्लेरेशन में किए गए सारे कमिटमेंट स्वैच्छिक हैं, यानी ये उन देशों की इच्छा पर निर्भर है कि वे इसके मुताबिक़ कितना काम करते हैं.

इस डिक्लेरेशन में देशों ने इस समिट में सात चक्र में हुई चर्चाओं का संज्ञान लिया और कहा कि वे स्वीकार करते हैं कि दिल्ली में हुए एआई समिट से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के विकास में अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलेगा. साथ ही राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान भी किया जाएगा.

समिट में चर्चाएं सात स्तंभ, या चक्रों पर आधारित थीं. इनमें शामिल थे- एआई के संसाधनों को डेमोक्रेटाइज़ करना यानी उसे लोगों तक पहुंचाना, एआई को आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए अपनाना, इत्यादि.

अब तक के एआई समिट में दिल्ली डिक्लेरेशन का समर्थन सबसे अधिक देशों ने किया है.

20 फ़रवरी को भारत और अमेरिका के बीच ‘पैक्स सिलिका’ का समझौता हुआ. ‘पैक्स सिलिका’ अमेरिका का शुरू किया हुआ वह समझौता है जो देशों के बीच आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर चिप्स जैसे टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देता है.

अभी तक आठ देश इस समझौते पर दस्तख़त कर चुके हैं, जिनमें जापान और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं.

‘पैक्स सिलिका’ पिछले साल दिसंबर में अमेरिका ने शुरू किया था. विशेषज्ञों का मानना है कि इसे चीन की बढ़ती ताक़त को रोकने लेने के लिए बनाया गया था.

इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि ये समझौता भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर में बढ़ोतरी लेकर आएगा.

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