अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया!

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 19-20 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया। अदालत ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग कर कांग्रेस की मंजूरी के बिना टैरिफ लगाए, जो संविधान के तहत केवल संसद का अधिकार है।फैसले का विस्तृत विवरणचीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि राष्ट्रपति को “साफ congressional मंजूरी” दिखानी होगी, जो ट्रंप के पास नहीं थी। अप्रैल 2025 से लागू ये टैरिफ (25% सामान्य + भारत पर रूस तेल आयात के लिए अतिरिक्त 25%, बाद में ट्रेड डील से 18%) ट्रेड घाटा कम करने के नाम पर लगाए गए थे। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को बरकरार रखा, जहां फेडरल सर्किट ने 7-4 से इन्हें अवैध ठहराया था। जस्टिस अलिटो, थॉमस और कैवनॉ ने असहमति जताई, कहा कि ये नीतिगत रूप से कानूनी हैं।भारतवंशी वकील नील कत्याल की भूमिकायूएस सॉलिसिटर जनरल रह चुके भारतवंशी वकील नील कत्याल ने पीटिशनर पक्ष से दलीलें दीं, जिनमें ट्रंप की “आपातकालीन शक्तियों” के दुरुपयोग पर जोर दिया। उनकी аргументация ने बहुमत को प्रभावित किया, संविधान की धारा 1, सेक्शन 8 के तहत टैरिफ पावर कांग्रेस को होने का हवाला देकर। हालांकि, फैसले में सीधे उनका नाम प्रमुखता से नहीं, लेकिन केस के प्रमुख वकीलों में वे थे।वैश्विक और भारत पर असरयह ट्रंप के आर्थिक एजेंडा को पहला बड़ा झटका है, जो चीन, यूके, जापान समेत ट्रेड डील्स प्रभावित कर सकता है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद टैरिफ 18% था; अब रिफंड की संभावना पर विचार हो रहा। भारत सरकार ने स्थिति पर नजर रखने का कहा। ट्रंप ने तत्काल 10% ग्लोबल टैरिफ का नया ऐलान किया।



