Uttarakhand Politics: खामोशी से विस्तार में खुद-ब-खुद दबता गया शोर; धामी कैबिनेट विस्तार!

Uttarakhand Politics: खामोशी से विस्तार में खुद-ब-खुद दबता गया शोर; धामी कैबिनेट विस्तार!
उत्तराखंड का राजनीतिक मिजाज उसकी वादियों सा शांत और ठंडा तो कतई नहीं है। यहां के भूगोल की तरह राजनीति की तासीर में भी उथल-पुथल और तपिश दबी है।
राज्य के 25 साल के राजनीतिक सफर पर गौर करें तो कोई भी मुख्यमंत्री तनाव मुक्त, सुरक्षित और आरामदायक तरीके से सरकार नहीं चला सका है। कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी को श्रेय जाता है जिन्होंने तमाम राजनीतिक विरोध और अपनों के शोर के बावजूद जैसे-तैसे पांच साल का कार्यकाल पूरा किया था। कांग्रेस हर चुनाव में भाजपा को बार-बार मुख्यमंत्री बदलने को लेकर घेरती रही है।
उत्तराखंड में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक साथ कई सवालों का जवाब दिया है, इसमें कांग्रेस का जवाब भी शामिल है। धामी राजनीतिक कयासों को दरकिनार कर इस विस्तार के साथ अपनी दूसरी सरकार की फिनिशिंग लाइन की ओर बढ़ चले हैं। धामी मंत्रिमंडल का विस्तार उन्हें और उनकी सरकार को मजबूती देने वाला है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि धामी के सामने उस तरह की चुनौतियां नहीं आईं जैसी पूर्व मुख्यमंत्रियों के सामने थीं। बीते चार से अधिक वर्षों में उनकी सरकार को हर बार एक नई तारीख दी जाती रही। इसे लेकर अब तो धामी खुद भी चटकारे लेने लगे थे।



