12 साल की उम्र में आए अयोध्या, कार्यसेवकों का जोश बढ़ाने के लिए संभाला मंच, प्रमुख नेता डॉ. रामविलास वेदांती का निधन

राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और भाजपा के पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती का सोमवार को रींवा मध्य प्रदेश के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल में निधन हो गया. मध्य प्रदेश के रीवा जनपद में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली. उन्हें ब्लड प्रेशर की शिकायत पर 13 दिसम्बर को शाम भर्ती कराया गया था. उनके निधन की खबर मिलते ही अयोध्या सहित देशभर में शोक की लहर दौड़ गई है.
संत समाज, राजनीतिक जगत और रामभक्तों में गहरा दुख व्याप्त है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, डॉ. रामविलास दास वेदांती मध्य प्रदेश के रीवा जिले में प्रवास पर थे. इसी दौरान कल अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया. चिकित्सकों की ओर से लगातार इलाज किए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया.
संतों ने जताया गहरा शोक
डॉ. वेदांती के निधन की सूचना मिलते ही उनके समर्थकों और अनुयायियों में शोक की लहर फैल गई. अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संतों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को याद करते हुए लोगों ने उन्हें एक प्रखर वक्ता, निर्भीक नेता और समर्पित रामभक्त बताया. उत्तराधिकारियों की ओर से मध्य प्रदेश से उनका पार्थिव शरीर लेकर कुछ ही देर में अयोध्या के लिए प्रस्थान किया जाएगा. अयोध्या पहुंचने के बाद उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन की व्यवस्था की जाएगी, जहां श्रद्धालु उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. अंतिम संस्कार अयोध्या में ही संपन्न किए जाने की संभावना है.
डॉ. वेदांती भी राम मंदिर निर्माण के लिए आजीवन संघर्षरत रहे. उन्होंने 1983-84 में गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत अवेद्यनाथ व महंत परमहंस रामचंद्र दास के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष को आगे बढ़ाया. 1996-98 तक मछली शहर जौनपुर के सांसद रहे. दोबारा 1998-99 में प्रतापगढ़ सदर से सांसद निर्वाचित हुए. इसके बाद 2004 में अमेठी लोकसभा से भी भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी से चुनाव हार गये.
मध्य प्रदेश के गुड़वा निवासी थे डॉ. रामविलास दास वेदांती
डॉ. रामविलास दास वेदांती का जीवन राम मंदिर आंदोलन और हिंदुत्व की विचारधारा को समर्पित रहा. उनके निधन से न केवल अयोध्या, बल्कि पूरे देश ने एक प्रभावशाली संत नेता और आंदोलनकारी को खो दिया है. उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाता रहेगा. डॉ. रामविलास दास वेदांती मूल रूप से मध्य प्रदेश के गुड़वा के रहने वाले थे.
2 साल की उम्र में ही डॉक्टर रामविलास वेदांती की माता जी का देहांत हो गया था. पिता राम सुमन त्रिपाठी के साथ मात्र 12 साल की उम्र में डॉ. रामविलास दास वेदांती रामनगरिया अयोध्या पहुंचे थे, जहां वह हनुमानगढ़ी में बाबा अभिराम दास के शिष्य बने थे. उसके बाद अयोध्या में ही भगवान की सेवा में लीन रहा करते थे. राम मंदिर बनना उनका संकल्प था.
90 के दशक में राम मंदिर आंदोलन में शामिल प्रमुख लोगों में डॉ. रामविलास दास वेदांती का नाम शामिल रहता था और आए दिन राम मंदिर आंदोलन को धार देने में कोई कसर डॉक्टर रामविलास दास वेदांती नहीं छोड़ते थे. हिंदूवादी नेता और फायर ब्रांड नेता के रूप में भी डॉक्टर रामविलास दास वेदांती का एक अलग पहचान था.



