एक तरफ सोनिया तो दूसरी तरफ खरगे-राहुल…सुदर्शन रेड्डी ने इस तरह दाखिल किया उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन

देश में उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं. NDA के कैंडिडेट सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार 20 अगस्त 2025 को उपराष्ट्रपति पद के लिए पर्चा दाखिल किया. अब विपक्षी इंडिया ब्लॉक के कैंडिडेट बी. सुदर्शन रेड्डी गुरुवार 21 अगस्त 2025 को पर्चा दाखिल किया. इस तरह इस बार का उपराष्ट्रपति चुनाव अब औपचारिक तौर पर राधाकृष्णन बनाम सुदर्शन रेड्डी हो गया है. इससे पहले सुदर्शन रेड्डी ने राम मनोहर लोहिया के मशहूर कथन (जब सड़क खामोश है, सदन आवारा होती है) का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी की खूब तारीफ की है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद ने गलियों में खामोशी को अपना साम्राज्य स्थापित नहीं करने दिया और तेलंगाना सरकार की तरह केंद्र सरकार को भी कास्ट सेंसस कराने के लिए सफलतापूर्वक प्रेरित किया.
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और गोवा के पहले लोकायुक्त बी सुदर्शन रेड्डी को INDIA गठबंधन की ओर से उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार नामित किया गया है. अब उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि वे ‘सड़क को खामोश नहीं रहने देते हैं’ और सरकारों को कार्रवाई के लिए बाध्य करते हैं. सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि राहुल गांधी की सक्रियता ने तेलंगाना सरकार को व्यवस्थित जाति जनगणना कराने के लिए राजी किया. उन्होंने डॉ. राममनोहर लोहिया का हवाला देते हुए कहा, ‘जब सड़क खामोश होती है, सदन आवारा हो जाता है. राहुल गांधी सड़क को खामोश नहीं होने देते, यह उनका स्वभाव और आदत बन चुका है.’
बिहार SIR पर चिंता
बी सुदर्शन रेड्डी ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का जिक्र करते हुए गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार पर गहरा खतरा मंडरा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि लोकतंत्र में आम आदमी के पास केवल एक हथियार है और वो है वोट का अधिकार. जब इसे ही छीना जाने लगे तो लोकतंत्र में क्या बचेगा?’ विपक्ष के उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार सुदर्शन रेड्डी ने यह भी कहा कि मौजूदा संकट संविधान के लिए सबसे बड़ा खतरा है.
सुदर्शन रेड्डी के नामांकन पत्र पर इन्होंने किया सिग्नेचर
सुदर्शन रेड्डी के नामांकन पत्रों पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, डीएमके सांसद तिरुचि शिवा और सपा सांसद रामगोपाल यादव समेत करीब 80 सांसदों ने हस्ताक्षर किए. नामांकन की घोषणा करते हुए खरगे ने उन्हें भारत के सबसे प्रगतिशील और विशिष्ट न्यायविदों में से एक बताया. नामांकन से पहले रेड्डी ने संसद के सेंट्रल हॉल में INDIA गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक भी की. रेड्डी ने कहा कि उन्हें एक सुप्रीम कोर्ट जज ने पूछा कि वह राजनीतिक दलदल में क्यों आ रहे हैं. इस पर उन्होंने जवाब दिया कि उनका सफर 1971 में वकील के तौर पर शुरू हुआ था और मौजूदा चुनौती भी उसी सफर का हिस्सा है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति का पद राजनीतिक संस्था नहीं है और वह इस जिम्मेदारी को एक संवैधानिक यात्रा का हिस्सा मानते हैं.



