पटना

बिहार के पुराने शिक्षकों पर लटकी तलवार: नौकरी बचाने के लिए देना होगा TET एग्जाम

बिहार के पुराने शिक्षकों पर लटकी तलवार: नौकरी बचाने के लिए देना होगा TET एग्जाम
बिहार के लाखों पुराने सरकारी शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के एक अहम आदेश के बाद अब इन शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी पड़ सकती है। अदालत के निर्देश के मद्देनजर राज्य का शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और इस दिशा में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। खबरों के मुताबिक, पुराने शिक्षकों के लिए एक ‘विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (Special TET) आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है, जिसे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) द्वारा कराया जा सकता है।
क्या होगी परीक्षा की रूपरेखा?
शिक्षा विभाग पुराने शिक्षकों के लिए स्पेशल टीईटी कराने की योजना तो बना रहा है, लेकिन इस परीक्षा का स्वरूप कैसा होगा और किन-किन शिक्षकों को इस दायरे में अनिवार्य रूप से शामिल होना पड़ेगा, इस पर अभी अंतिम मुहर लगना बाकी है। विभाग जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
क्या था सुप्रीम कोर्ट का मुख्य आदेश?
यह पूरा मामला 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ‘अंजुमन इशाअत-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र सरकार’ मामले में दिए गए फैसले से जुड़ा है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के दायरे में आने वाले सभी स्कूलों के शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य है।
अदालत के नियमों के अनुसार:
जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 साल से अधिक का समय बचा है: उन्हें अपनी नौकरी सुरक्षित रखने के लिए आगामी समय-सीमा के भीतर टीईटी पास करना होगा। परीक्षा पास न करने पर उन्हें सेवा से मुक्त किया जा सकता है या अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।
जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में 5 साल से कम समय बचा है: वे बिना टीईटी पास किए भी अपने रिटायरमेंट तक नौकरी जारी रख सकेंगे, हालांकि उन्हें प्रमोशन (पदोन्नति) का लाभ नहीं मिलेगा।
बाद में, 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की समीक्षा याचिकाएं खारिज करते हुए शिक्षकों के लिए टीईटी पास करने की समय-सीमा को बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दिया था।
बिहार में कुल कितने जिले हैं?
बिहार राज्य में प्रशासनिक और विकास कार्यों की सुगमता के लिए कुल 38 जिले हैं।
इन सभी जिलों को 9 प्रशासनिक प्रमंडलों (Divisions) में बांटा गया है।
क्षेत्रफल की दृष्टि से पश्चिमी चंपारण सबसे बड़ा और शेखपुरा सबसे छोटा जिला है, जबकि राजधानी पटना सबसे अधिक आबादी वाला प्रमुख जिला है।
बिहार की कुल जनसंख्या कितनी है?
वर्ष 2011 की आधिकारिक जनगणना के अनुसार बिहार की कुल जनसंख्या लगभग 10.41 करोड़ थी।
जनसंख्या के मामले में उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के बाद बिहार देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है।
वर्तमान अनुमानित आंकड़ों के अनुसार यह संख्या बढ़कर लगभग 13 से 14 करोड़ के आसपास पहुँच चुकी है, और यहाँ का जनघनत्व देश में सबसे अधिक है।

Neeraj Kumar Srivastava

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