जीडीपी-महंगाई और रुपये की कमजोरी को लेकर क्या बोली वित्त मंत्री

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के बाद नेटवर्क 18 के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी के साथ बातचीत में कहा कि पूरी दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है. उन्होंने कहा कि सरकार को कोई भी फैसला लेने से पहले इन चुनौतियों को ध्यान में रखना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि लोगों की बजट के बारे में अपनी-अपनी राय हो सकती है, इसमें कोई परेशानी नहीं है.
वित्त मंत्री का कहना है कि आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद बहुत मजबूत है. उन्होंने बताया कि इस बार बजट बनाते समय कई ऐसी अनिश्चितताओं और वैश्विक बदलावों को ध्यान में रखना पड़ा, जो पहले कभी नहीं देखे गए थे. सरकार के सामने चुनौती यह थी कि न केवल इस एक साल की योजना बनाई जाए, बल्कि अगले पांच वर्षों (वित्त आयोग के नजरिए से) और साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को भी ध्यान में रखा जाए. सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सिर्फ टैक्स के प्रस्तावों के दम पर 2047 का लक्ष्य हासिल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए एक लंबी और गहरी योजना की जरूरत है.
भारत की स्थिरता दुनिया को दिखानी है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता को दुनिया के सामने रखना है, साथ ही व्यापार करने की आसानी (Ease of doing business) में भी सुधार करना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय आ गया है जब हमें निवेशकों के लिए ‘रेड कार्पेट’ बिछाना होगा और सरकारी फाइलों के ‘रेड टेप’ (लाल फीताशाही) को खत्म करना होगा, और ये दोनों काम एक साथ होने चाहिए.
विपक्ष में गहरी समझ की कमी
विपक्ष द्वारा बजट को ‘दृष्टिकोणहीन’ (Visionless) कहे जाने पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि ऐसा कहना बजट की गहरी समझ की कमी को दर्शाता है. सीतारमण ने भरोसा दिलाया कि आर्थिक सुधारों का सिलसिला केवल बजट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे बजट के बाद भी लगातार जारी रखा जाएगा.
महंगाई चिंता की बात नहीं
कस्टम्स ड्यूटी में पूरी तरह से बदलाव (Overhaul) इस बजट का सबसे प्रमुख सुधार है. फिलहाल महंगाई कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है. हमें लंबी अवधि की रियल जीडीपी (GDP) ग्रोथ को बनाए रखने का पूरा भरोसा है. नॉमिनल जीडीपी में मजबूती का सीधा संबंध देश में आने वाले ज्यादा विदेशी निवेश (Capital Inflow) से है. दुनिया भर के फंड्स को भारत की ओर आकर्षित करना विकास के लिए सबसे जरूरी है.
सोने की ओर जाना स्वाभाविक
सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को लेकर सीतारमण ने कहा कि यह अस्थिरता घरेलू नीतियों के बजाय वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव के कारण है. उन्होंने इसे रुपये की कमजोरी से भी जोड़ा. उन्होंने कहा कि जब प्रमुख मुद्राओं पर से भरोसा कम होता है, तो निवेशक स्वाभाविक रूप से सोने की ओर रुख करते हैं, और वैश्विक जोखिमों के बने रहने के कारण इसकी कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
बिना सोच-समझे बोलते हैं राहुल गांधी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी अक्सर बिना सोचे-समझे (shoots from the hip) बोलते हैं और अपनी बातें रखते समय मजबूत बुनियादी आंकड़ों का सहारा नहीं लेते. उन्होंने राहुल गांधी के पुराने ‘मृत अर्थव्यवस्था’ (dead economy) वाले बयान की आलोचना करते हुए कहा कि यह जल्दबाजी में दिया गया बयान था जिसने उनके अपने ही तर्क को कमजोर कर दिया. सीतारमण ने आगे कहा कि इस तरह की टिप्पणियां अक्सर बिना किसी पर्याप्त आधार के की जाती हैं. उन्होंने कहा कि भारत एक अधिक विश्वसनीय और आंकड़ों पर आधारित (data-driven) विपक्षी आवाज का हकदार है.
राहुल गांधी और डेटा की कमी विपक्ष के नेता राहुल गांधी बिना किसी ठोस आधार के अपनी बातें रखते हैं. उन्होंने राहुल के ‘मृत अर्थव्यवस्था’ वाले बयान को जल्दबाजी में दिया गया गलत बयान बताया जिससे उनकी अपनी बात कमजोर हुई. विश्वसनीय विपक्ष की जरूरत भारत को एक ऐसे विपक्ष की जरूरत है जो विश्वसनीय हो और अपनी बात तथ्यों व आंकड़ों के साथ रखे. बिना आधार के की जाने वाली टिप्पणियां विपक्ष की गंभीरता को कम करती हैं
क्या बैंकों का विलय जारी रहेगा?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के विलय या एकीकरण पर कोई भी फैसला संबंधित समिति की सिफारिशों पर निर्भर करेगा. उन्होंने आगे कहा कि समिति की रिपोर्ट आने से पहले इस पर कुछ भी कहना उनके लिए उचित नहीं होगा. पीएसयू बैंकों के विलय पर फैसला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण का कदम संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया जाएगा. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वह समिति के निष्कर्षों से पहले कोई पूर्व-निर्धारित बयान नहीं देना चाहतीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के विलय या एकीकरण पर कोई भी फैसला संबंधित समिति की सिफारिशों पर निर्भर करेगा. उन्होंने आगे कहा कि समिति की रिपोर्ट आने से पहले इस पर कुछ भी कहना उनके लिए उचित नहीं होगा. पीएसयू बैंकों के विलय पर फैसला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण का कदम संबंधित समिति की सिफारिशों के आधार पर उठाया जाएगा. वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वह समिति के निष्कर्षों से पहले कोई पूर्व-निर्धारित बयान नहीं देना चाहतीं
तमिलनाडु के सीएम की दुखद टिप्पणी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के उस दावे को “दुखद टिप्पणी” (sad commentary) करार दिया है, जिसमें कहा गया था कि बजट में राज्य की अनदेखी की गई है. उन्होंने तर्क दिया कि कई बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी उपाय सीधे तौर पर तमिलनाडु और केरल दोनों को लाभ पहुँचाते हैं. उन्होंने सुपर-फास्ट और हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं, ‘रेयर अर्थ कॉरिडोर’ और नारियल किसानों के लिए समर्थन को चल रही और नियोजित पहलों के उदाहरण के रूप में पेश किया.
तमिलनाडु को बहुत कुछ दिया गया
सीतारमण ने ‘विकसित भारत’ पहल और मनरेगा (MNREGA) जैसी योजनाओं के साथ-साथ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आवंटित फंड का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों और परियोजनाओं की तमिलनाडु में स्पष्ट मौजूदगी है. उन्होंने आगे कहा कि चुनावी नैरेटिव को व्यापक राष्ट्रीय आवंटन पर हावी नहीं होना चाहिए और यह स्पष्ट किया कि बजट के प्रावधान किसी विशेष क्षेत्र को बाहर करने के बजाय सभी राज्यों में लाभ पहुंचाते हैं
स्टालिन के आरोपों पर पलटवार तमिलनाडु की अनदेखी के दावे को वित्त मंत्री ने गलत बताया. उन्होंने कहा कि सुपर-फास्ट रेल और रेयर अर्थ कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स से राज्य को सीधा फायदा मिल रहा है. योजनाओं में तमिलनाडु की हिस्सेदारी सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नारियल किसानों के लिए बजट में पर्याप्त प्रावधान हैं. सीतारमण के अनुसार, विकसित भारत और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ भी तमिलनाडु को मिल रहा है और चुनावी राजनीति के कारण इन तथ्यों को नहीं छिपाना चाहिए



