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भारत-EU डील की अहमियत व्यापार से बढ़कर, दोनों पूरी कर सकते हैं एक-दूसरे की ये जरूरत

भारत और यूरोपियन यूनियन की ऐतिहासिक डील दोनों पक्षों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। इस डील ने दुनिया में यह साबित कर दिया है कि कोई भी व्यापार समझौता तालमेल के बिना सार्थक नहीं हो सकता।

यूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस सप्ताह ऐलान किया कि भारत और EU ने अब तक की सबसे बड़ी डील कर ली है। वह बिल्कुल सही हो सकती हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता ही नहीं, अब तक का सबसे विस्तृत और सहयोगात्मक समझौता भी है।

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इस डील को आकार देने में भले बरसों लगे, लेकिन यह जिस समय पूरा हुआ है, उसका महत्व खास है। यह डील आधुनिक FTA के लिए आदर्श है, जो बताती है कि नियमों और मानकों में बेहतर तालमेल व एक-दूसरे की घरेलू प्राथमिकताओं का सम्मान किए बिना कोई भी व्यापार समझौता सार्थक नहीं हो सकता।

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लागू होने के बाद यह समझौता करीब दो अरब लोगों को कवर करेगा। इसका इकॉनमिक साइज होगा 25 ट्रिलियन डॉलर यानी वैश्विक GDP का 25% और कुल वैश्विक व्यापार का एक तिहाई। इससे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और रिसर्च व इनोवेशन में लाखों रोजगार पैदा होंगे। व्यापारिक बाधाएं कम होने से भारत को विकसित बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे यूरोप के टेक सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते के होते ही एक बड़ी यूरोपीय कंपनी के प्रमुख ने मुझसे कहा कि वह भारत में निर्माण के लिए तैयार हैं। यही भावना दूसरी कंपनियों की भी है।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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