उत्‍तर प्रदेश

पत्रकारिता की आड़ में गुंडागर्दी? जौनपुर जिला अस्पताल की सच्चाई

जौनपुर, क्या पत्रकार होने का मतलब कानून से ऊपर होना है? क्या अस्पताल जैसे पवित्र स्थान पर गुंडागर्दी की इजाज़त है? आज हम आपको जौनपुर जिला अस्पताल की एक चौंकाने वाली सच्चाई…जौनपुर जिला अस्पताल—जहाँ लोग इलाज और उम्मीद लेकर आते हैं। लेकिन इसी अस्पताल में एक व्यक्ति रत्तीलाल, जो खुद को पत्रकार बताता है, खुलेआम दबंगई और बदतमीज़ी करता है। रत्तीलाल का व्यवहार न सिर्फ मरीजों के साथ अमानवीय है, बल्कि उनके परिजनों (गार्जियन) के साथ भी वह गाली-गलौज और धमकी देने से पीछे नहीं हटता। वह खुलेआम कहता है—

“हम पत्रकार हैं, जो चाहेंगे वही होगा!सोचिए… जो मरीज दर्द में है, जिसका परिवार पहले से तनाव में है, उसके सामने अगर कोई खुद को पत्रकार बताकर धमकाने लगे, तो उसकी हालत क्या होगी? गंभीर सवाल

क्या पत्रकारिता का मतलब डर फैलाना है? क्या प्रेस कार्ड गुंडागर्दी का लाइसेंस बन गया है? क्या ऐसे लोगों की वजह से सच्चे पत्रकारों की छवि खराब नहीं होती? असल पत्रकारिता सच दिखाने का काम करती है, ना कि लोगों को डराने और दबाने का। अगर कोई व्यक्ति पत्रकार होने का झूठा दावा कर धमकी देता है

सरकारी अस्पताल में बाधा डालता है

मरीजों और स्टाफ से बदसलूकी करता है तो उसके खिलाफ IPC की धाराएँ, अस्पताल प्रशासन, और पुलिस कार्यवाही पूरी तरह से जायज़ है। पत्रकार हो या आम नागरिक

कानून सबके लिए बराबर है।

ऐसे दबंग लोगों पर तुरंत कानूनी कार्यवाही होनी चाहिए,

ताकि मरीज सुरक्षित रहें अस्पताल का माहौल शांत रहे और सच्ची पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।

हम प्रशासन से मांग करते हैं—

ऐसे लोगों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। “पत्रकारिता सेवा है, सत्ता नहीं। और कानून से ऊपर कोई नहीं।”

saamyikhans

former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button