मुकेश सहनी: बिहार की राजनीति में नया पावर सेंटर या रणनीतिक दांव?

बिहार की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। पटना के एक होटल में हुई हालिया बैठकों ने महागठबंधन के समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है। इन बैठकों के केंद्र में हैं — मुकेश सहनी, जिन्हें अब ‘डिप्टी सीएम फेस’ के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीति के इस अप्रत्याशित मोड़ ने न सिर्फ विपक्ष को चौका दिया, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है।
मुकेश सहनी, जिन्हें कभी ‘सन ऑफ मल्लाह’ कहा गया था, ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की आवाज़ उठाने से की थी। लेकिन अब वे सिर्फ समाजिक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि सत्ता समीकरण के प्रमुख खिलाड़ी बनकर उभरे हैं। कहा जा रहा है कि उनकी लोकप्रियता और ‘मल्लाह’ समुदाय में मजबूत पकड़ ने उन्हें यह नई पहचान दिलाई है।
पटना के जिस होटल में महागठबंधन के शीर्ष नेता जुटे, वहीं यह तय हुआ कि सहनी को अगले चुनावों में प्रमुख चेहरा बनाकर पेश किया जाएगा। इसके पीछे तर्क यह है कि सहनी न सिर्फ एनडीए को चुनौती दे सकते हैं, बल्कि महागठबंधन के अंदर भी एक संतुलन का काम करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला महागठबंधन के लिए जोखिम भरा लेकिन दूरगामी साबित हो सकता है। अगर सहनी अपनी सामाजिक अपील को राजनीतिक समर्थन में बदल पाते हैं, तो वे बिहार की राजनीति में नया पावर सेंटर बन सकते हैं। वरना, यह प्रयोग महागठबंधन की एक और असफल रणनीति के रूप में दर्ज होगा।



