अपने ही बुने जाल में फंसे डोनाल्ड ट्रंप! चीन ने ऐंठा कान तो भारत की शरण में आया अमेरिका

भारतीय उत्पादों पर मनमाने तरीके से 50 फीसद टैरिफ लगाने वाले अमेरिका की अक्ल धीरे-धीरे ठिकाने आ रही है. टैरिफ वॉर छेड़ने वाले डोनाल्ड ट्रंप के देश की गर्दन जब फंसी तो उन्हें अब भारत की याद आई है. सिर्फ याद ही नहीं आई, बल्कि भारत से मदद उम्मीद भी जताई है. टैरिफ वॉर से बात आगे निकल चुकी है. मामला रेयर अर्थ मिनरल्स या रेयर अर्थ मैटिरियल (Rare Earth Minerals or Rare Erth Materials) के एक्सपोर्ट तक पहुंच गया है. रेयर अर्थ मिनरल्स पर चीन का आधिपत्य है. रेयर अर्थ मिनरल्स के बिना इलेक्ट्रिक व्हिकल (EV) से लेकर एयरक्राफ्ट तक का प्रोडक्शन बुरी तरह से प्रभावित हो सकता है. अब चीन ने भारत को रेयर अर्थ मिनरल्स एक्सपोर्ट करने के लिए एक शर्त रखी है. बीजिंग का कहना है कि भारत को जो रेयर अर्थ मिनरल्स निर्यात किया जाएगा, उसकी पहुंच अमेरिका तक नहीं होनी चाहिए. चीन के सख्त रुख के बाद अमेरिका की अक्ल ठिकाने आ गई है. ट्रंप सरकार ने उम्मीद जताई है कि इस मामले में भारत उसकी मदद करेगा.
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह चीन के हालिया रेयर अर्थ (दुर्लभ खनिज) निर्यात नियंत्रणों का मुकाबला करने के अपने प्रयासों में भारत समेत अपने सहयोगी देशों से समर्थन की उम्मीद कर रहा है. अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन चीन बनाम दुनिया जैसी स्थिति में अपने वैश्विक साझेदारों के साथ खड़ा रहेगा. फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा, ‘हम पहले ही अपने सहयोगियों से संपर्क में हैं. इस हफ्ते हमारी उनसे बैठकें होंगी और मुझे विश्वास है कि हमें यूरोपीय देशों, भारत और एशिया की लोकतांत्रिक सरकारों से ठोस समर्थन मिलेगा. यह एक वैश्विक समस्या है और मुझे भरोसा है कि हमारे वैश्विक सहयोगी हमारे साथ आएंगे.’
चीन पर सख्ती
बेसेंट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका चीन के इन एक्सपोर्ट कर्ब को जारी नहीं रहने देगा और हर विकल्प उनके सामने है. यानी आवश्यक हुआ तो वाशिंगटन कठोर कदम उठा सकता है. अमेरिकी वित्त मंत्री ने कहा, ‘बीते गर्मियों में हमें चीन के खिलाफ 12 उपाय लागू करने पड़े थे, जिनका असर उन प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ा था जो जेट इंजन और उसके हिस्से बनाने में इस्तेमाल होते हैं. इसके कारण उन्हें अपने नागरिक विमान बेड़े का बड़ा हिस्सा ग्राउंड करना पड़ा था. हमारे पास कई कठोर विकल्प हैं जिनका उपयोग हम फिर कर सकते हैं.’ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यदि बीजिंग अपने निर्यात नियंत्रण नहीं हटाता तो 1 नवंबर से चीन के उत्पादों पर 100 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा. इसके साथ ही अमेरिका महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर के निर्यात पर भी नियंत्रण लगाने पर विचार कर रहा है.
शत्रुतापूर्ण व्यवहार का आरोपी
ट्रंप ने एक अन्य पोस्ट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनफिंग के साथ होने वाली बैठक रद्द करने के संकेत दिए थे और बीजिंग पर ‘शत्रुतापूर्ण व्यापार व्यवहार’ (Hostile Trade Policy) का आरोप लगाया था. हालांकि, रविवार को उन्होंने नरम रुख दिखाते हुए कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है और शी जिनपिंग सिर्फ एक कठिन पल से गुजर रहे थे. चीन ने पिछले हफ्ते रेयर अर्थ मिनरल्स के निर्यात नियंत्रणों को सख्त किया था और अमेरिकी जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था. यह कदम ऐसे समय आया जब वाशिंगटन ने अपने निर्यात नियंत्रणों को सख्त किया था और अमेरिकी जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया था. यह कदम ऐसे समय आया जब वाशिंगटन ने अपने निर्यात नियमों को और कड़ा किया था. वित्त मंत्री बेसेंट ने पुष्टि की कि ट्रंप और शी जिनफिंग के बीच बैठक अब भी तय है और यह दक्षिण कोरिया में होगी. उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि शुल्क 1 नवंबर से पहले लागू नहीं होंगे. वे पार्टी चेयर शी जिनपिंग से कोरिया में मिलेंगे. वीकेंड में दोनों पक्षों के बीच पर्याप्त बातचीत हुई है.’



