मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं… विष्णु की मूर्ति विवाद पर बोले सीजेआई गवई

चीफ जस्टिस बीआर गवई ने सोशल मीडिया पर अपने हालिया बयान को लेकर उठे विवाद पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि विष्णु मूर्ति के पुनर्स्थापन की याचिका पर उनकी टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पेश किया गया है. एक कार्यक्रम के दौरान CJI गवई ने स्पष्ट किया कि किसी ने मुझे बताया कि मेरे दिए गए बयान को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है. मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं. यह बयान मध्य प्रदेश के खजुराहो मंदिर में क्षतिग्रस्त भगवान विष्णु की मूर्ति के मामले से जुड़ा है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों ने व्यापक विवाद पैदा कर दिया था. यह मामला 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आया था.
याचिकाकर्ता राकेश दालाल ने खजुराहो के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल जावरी मंदिर में स्थित सात फुट ऊंची भगवान विष्णु की क्षतिग्रस्त मूर्ति के पुनर्निर्माण और पुनर्स्थापन की मांग की थी. याचिका में दावा किया गया कि मूर्ति मुगल आक्रमणों के दौरान क्षतिग्रस्त हुई और पुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (ASI) तथा केंद्र सरकार की लापरवाही से इसका संरक्षण नहीं हो पा रहा, जो भक्तों के पूजा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. CJI गवई और जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह की बेंच ने याचिका को खारिज करते हुए इसे पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन करार दिया. CJI ने याचिकाकर्ता से कहा- आप भगवान विष्णु के कट्टर भक्त हैं, तो जाइए और प्रार्थना कीजिए. यह पुरातात्विक स्थल है,ASI को अनुमति देनी होगी. उन्होंने आगे कहा- इस बीच, अगर शैववाद से कोई आपत्ति न हो, तो शिव लिंग की पूजा कर सकते हैं, खजुराहो में सबसे बड़ा शिव लिंग है.”
वायरल वीडियो विवाद
ये टिप्पणियां सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और व्यापक आलोचना का शिकार बनीं. कई यूजर्स ने इन्हें “असंवेदनशील” और “हिंदू भावनाओं का अपमान” बताया. #ImpeachCJI ट्रेंड करने लगा, जिसमें CJI के खिलाफ महाभियोग की मांग की गई. वकील विनीत जिंदल ने CJI को पत्र लिखकर टिप्पणियां वापस लेने की मांग की, जिसमें कहा गया कि ये टिप्पणियां भगवान विष्णु और सनातन धर्म के खिलाफ हैं. राष्ट्रपति को भी पत्र भेजा गया. अन्य वकीलों जैसे सत्यम सिंह राजपूत ने भी खुला पत्र लिखा, जिसमें स्पष्टीकरण की मांग की गई.



