देहदान से चिकित्सा शिक्षा को नई दिशा, युवा दधीचि अभियान की पहल पर संगोष्ठी

*गोंडा*
गोंडा जिले में‘निज तन का दान करें, कई जनों के जीवन में उजियारा भरें’ इसी भावना को साकार करने के उद्देश्य से युवा दधीचि देहदान अभियान, कानपुर द्वारा देहदान जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें यह संदेश दिया गया कि मृत्यु के उपरांत शरीर को चिकित्सकीय अनुसंधान हेतु दान करना मानव सेवा का सर्वोच्च कार्य है, जिससे मेडिकल छात्रों को बेहतर चिकित्सक बनने में सहायता मिलती है।
अभियान के संस्थापक मनोज सेंगर ने कार्यक्रम में बताया कि यह पहल ऋषि दधीचि की त्याग परंपरा से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि देहदान पूरी तरह से नि:स्वार्थ और समाजहित की भावना से किया जाने वाला संकल्प है, जो चिकित्सा विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है। देहदान के लिए संस्था द्वारा ‘देहदान संकल्प पत्र’ भरवाया जाता है, जिसमें व्यक्ति अपनी स्वयं की इच्छा एवं परिवार की सहमति से यह निर्णय दर्ज कराता है। संस्था का कार्यालय ‘युवा दधीचि परिवार’, 220/6, जे. ई. कॉलोनी, जाजमऊ, कानपुर में स्थित है। इच्छुक लोग 0512-2461754 तथा मो. 9839161790, 9453482790 पर संपर्क कर अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
संगोष्ठी में स्वशासी मेडिकल कॉलेज गोंडा के प्रधानाचार्य प्रो. डॉ. धनंजय श्रीकांत कोटास्थाने, नोडल अफसर डॉ. कुलदीप पांडे,
एनाटामी विभाग के हेड डॉ. मरूथी प्रसाद, असिस्टंट प्रोफेसर डॉ. राजेश आर., डॉ. वैशाली कोटास्थाने, डॉ. अफरीन अरशद, डॉ. शोमी आनंद, हेल्प डेस्क मैनेजर अनिल वर्मा, मैट्रन सुनीता सहित कई चिकित्सक और छात्र उपस्थित रहे। मीडिया से मुखातिब होते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने कहा कि देहदान की सोच समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और मानवीय मूल्य दोनों को सशक्त बनाती है। यह आवश्यक है कि लोग इस विषय को सकारात्मक दृष्टि से समझें और इस पुण्य कार्य में आगे आएं। संस्था ने समाज से अपील की है कि वे जीवन के बाद भी मानवता की सेवा करने के इस अभियान से जुड़ें और चिकित्सा शिक्षा को और अधिक व्यवहारिक एवं सशक्त बनाने में अपना योगदान दें।



