साल 2025 में बढ़ते महिला सुरक्षा मामले: न्याय तक पहुँचने की चुनौती.

देश में महिला सुरक्षा एक बार फिर चर्चा में है।
साल 2025 में दर्ज किए गए मामले यह दर्शाते हैं कि कानून मौजूद होने के बावजूद न्याय तक पहुँचने की प्रक्रिया बहुत धीमी है।
अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पूरे देश में लगभग 1 लाख से अधिक महिला सुरक्षा मामले दर्ज किए गए।
लेकिन इनमें से केवल 30-35% मामलों में ही न्याय की प्रक्रिया पूरी हो पाई।
इन वजह से पीड़िताओं को महीनों या सालों तक न्याय की प्रतीक्षा करनी पड़ती है
पुलिस द्वारा साक्ष्य संग्रह और प्राथमिकी में
देरी कोर्ट में अधिकारियों और जज की कमी
अस्पष्ट जिम्मेदारी और लंबी कानूनी प्रक्रिया
सुरक्षा की कमी और न्याय की देरी के कारण आम लोगों में चिंता बढ़ी है।
महिलाएं अपने रोज़मर्रा के जीवन में असुरक्षित महसूस करती हैं,
और अपराधियों में हौसला बढ़ता जा रहा है।
महिला सुरक्षा केवल कानून से नहीं,
बल्कि सिस्टम की जवाबदेही और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी है।
“यदि समय पर कार्रवाई होती,
कितनी ज़िंदगियाँ बच सकती थीं — यही सवाल हर नागरिक के सामने है।”



