
अल फलाह यूनिवर्सिटी के बिल्डिंग नंबर 17 में स्थित कमरा नंबर 4 और 13 आतंकवादियों उमर और मुजम्मिल की गुप्त बैठक और साजिश रचने वाली जगह थी। दिल्ली लाल किले के पास हुए धमाके की जांच के दौरान उनकी मिलनसार डायरी और नोटबुक पुलिस के हाथ लगी, जो आतंकवादी योजना के कई राज खोलती है।
कमरा नंबर 13 पुलवामा का रहने वाला डॉक्टर मुजम्मिल शकील का था, जहां वह अपने आतंकी साथियों के साथ छुपकर मीटिंग किया करता था। वहीं, कमरा नंबर 4 में डॉक्टर उमर रहते थे। दोनों कमरों से पुलिस ने पेन ड्राइव, डिजिटल डिवाइस, और कैमिकल समेत कई दस्तावेज बरामद किए हैं, जिनसे पता चलता है कि यह लोग यूनिवर्सिटी की लैब से कैमिकल चुराकर फरीदाबाद के धौज और टागा गांव में विस्फोटक बनाते थे।
डायरी में कई कोड वर्ड्स लिखे थे, जिनसे पता चला कि 8 से 12 नवंबर के बीच एक बड़ा हमला किया जाना था। इसमें 25-30 लोगों के नाम शामिल थे, जो जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद के आस-पास के थे। डायरी ने यह भी पुष्टि की है कि यह आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजावत-उल-हिंद के हैंडलर्स के संपर्क में था। अगर यह साजिश न पकड़ी जाती तो देश के कई हिस्सों में हमला होता।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अगर जम्मू कश्मीर पुलिस ने समय रहते इस नेटवर्क को नहीं पकड़ा होता, तो दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में विस्फोट हो सकते थे। बरामद छापेमारी और डिजिटल सबूतों ने दिल्ली धमाकों की गुत्थी सुलझाने में मदद की है, जिससे आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का रास्ता खुला है।



