वंदे मातरम को राष्ट्रगान का दर्जा मिलने से कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM को क्या दिक्कत?

सरकार ने अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है… लेकिन इसका विरोध पहले ही शुरू हो गया है. विरोध करने वालों में कांग्रेस भी है, समाजवादी पार्टी भी और AIMIM जैसी पार्टियां भी हैं.
77 वें गणतंत्र दिवस पर दुनिया ने भारत की सैन्य ताकत, तकनीकी प्रगति और सांस्कृतिक विविधता की ताकत देखी. इस समारोह का थीम था- वंदे मातरम् के 150 साल. हर साल की तरह इस बार भी अलग-अलग विभागों, अलग अलग राज्यों की कई झांकियां थीं. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा में रही संस्कृति मंत्रालय की झांकी. दरअसल संस्कृति मंत्रालय की झांकी पर राष्ट्रगीत, यानी वंदेमातरम का दुर्गा स्तुति वाला वो छंद था, जिसे मुस्लिम लीग के विरोध के बाद, 1937 के फैजाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने हटवा दिया था. कांग्रेस को लगता था कि ये हिंदू-मुस्लिम में दरार डालने वाला है.
जान लीजिए इसका इतिहास
हालांकि 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कलम से निकला गीत वंदे मातरम, राष्ट्रगीत तो बाद में बना, लेकिन देश की आज़ादी का महामंत्र उसके पहले ही बन चुका था. सूत्रों का दावा है कि केंद्र सरकार अब वंदेमातरम के लिए भी वही प्रोटोकॉल, यानी नियम कायदे तय करने की तैयारी कर रही है, जो राष्ट्रगान यानी जन गण मन के लिए लागू हैं. राष्ट्र गीत वंदे मातरम को अगर राष्ट्रगान के समान दर्जा देने वाला कानून बना तो पहला सवाल है कि क्या कुछ बदलेगा. तो जवाब ये है कि जब वंदे मातरम बजेगा – तो लोगों को ठीक उसी तरह सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा, जिस तरह अभी वो जन गण मन को सुनकर खड़े होते हैं… अभी राष्ट्रगान में बाधा डालने, या उसका अपमान करने पर तीन साल की सजा का प्रावधान है. राष्ट्रगीत यानी वंदेमातरम को लेकर अगर कानून बना, तो वंदेमातरम का अपमान करने पर भी 3 साल की कैद हो सकती है.



