दिल्ली में क्लाउड सीडिंग: प्रदूषण से प्रभावित राजधानी ने नया प्रयोग किया

दिल्ली में वायु गुणवत्ता ‘बहुत ही खराब’ श्रेणी में थी। इसको देखते हुए राजधानी में मंगलवार को क्लाउड सीडिंग (बादल बुवाई) का पहला प्रयोग किया गया ताकि कृत्रिम वर्षा के माध्यम से वायु प्रदूषण को कम किया जा सके।
पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने बताया कि यह प्रयोग IIT कानपुर के सहयोग से किया गया है, जिसमें विमान से बादलों में ऊष्मा-रसायन छोड़े गए जिससे वर्षा को प्रेरित किया जा सके।
हालांकि यह तकनीक विश्व स्तर पर प्रयोग में है, लेकिन इसके प्रभाव पर वैज्ञानिकों में मतभेद हैं। IIT-कानपुर के अध्ययन के अनुसार वर्षा 15 मिनट से 4 घंटे के भीतर हो सकती है — लेकिन यह अस्थायी समाधान है क्योंकि स्रोत खुद नहीं बदले गए हैं।
इस कदम की पृष्ठभूमि में दिल्ली एवं आसपास के क्षेत्रों में ठंडी हवा, वाहन-उत्सर्जन और फसलजलाने के धुएँ मिलने से हर साल सर्दियों में गंभीर स्मॉग की समस्या बन जाती है। इस नए प्रयोग से समय मिलेगा लेकिन मूल समस्या — प्रदूषण स्रोतों का नियंत्रण — अब भी बनी हुई है।
– क्या यह वर्षा वास्तविक रूप से प्रदूषण कम करेगी या सिर्फ वशीकरण की



