
21 दिसंबर 2025 को देशभर के शैक्षणिक संस्थानों और कंपनियों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई पहल देखने को मिली। बढ़ते तनाव, प्रतिस्पर्धा और कार्य दबाव को देखते हुए काउंसलिंग और वेलनेस प्रोग्राम को अनिवार्य किया जा रहा है।
कॉलेजों में छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेल स्थापित किए जा रहे हैं, जहां विशेषज्ञों से गोपनीय परामर्श की सुविधा उपलब्ध है। कई निजी कंपनियों ने भी कर्मचारियों के लिए नियमित मानसिक स्वास्थ्य सत्र शुरू किए हैं।
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि समय रहते सहायता मिलने से अवसाद और चिंता जैसी समस्याओं को गंभीर होने से रोका जा सकता है। युवाओं में अब इस विषय पर खुलकर बात करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो एक सकारात्मक बदलाव है।



