यह औपनिवेशिक सोच… ब्राह्मण विवाद पर बोलीं निर्मला सीतारमण, विरोधियों को लगेगी मिर्ची

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिनमें भारत के खिलाफ ‘ब्राह्मण प्रोफिटियरिंग’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए. उन्होंने कहा कि जब कोई विदेशी नेता या अधिकारी भारत को लेकर ऐसी बातें कहता है तो यह अलग बात है. लेकिन जब हमारे ही देश के लोग उस सोच को सही ठहराते हैं तो यह और ज्यादा पीड़ा देता है.
सीतारमण ने कहा कि विदेशी आलोचना पर तो कूटनीतिक जगत आश्चर्य जताता है. लेकिन भारत के भीतर ऐसे कमेंट को सही ठहराना किसी भी तरह उचित नहीं है. उन्होंने कहा, “मुझे यह और ज्यादा चुभता है कि हमारे ही बीच कुछ लोग इस तरह के औपनिवेशिक तर्कों का समर्थन करते हैं. आत्मनिर्भरता का मतलब आत्मसम्मान भी है”.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिका के व्हाइट हाउस ट्रेड एडवाइजर पीटर नवारो ने एक Fox News इंटरव्यू में कहा कि ‘Brahmins’ भारत में रूस से तेल खरीद-फरोख्त से लाभ उठा रहे हैं, आम जनता की कीमत पर. उन्होंने यह भी कहा कि कई बार ऐसा होता है कि रूस सस्ता कच्चा तेल देता है, जिसे भारतीय रिफाइनर प्रॉसेस करके मुनाफे के साथ दूसरी जगह बेचते हैं. इसी दौरान उन्होंने “Boston Brahmins” का जिक्र भी किया.
आत्मनिर्भर भारत का मतलब आत्मसम्मान भी
वित्त मंत्री ने इंटरव्यू में साफ कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता का नारा नहीं है. इसमें भारत की अस्मिता और आत्मसम्मान भी शामिल है. उन्होंने कहा, “कुछ लोग हमें समझाने की कोशिश करते हैं कि इन शब्दों का इस्तेमाल गलत नहीं है. लेकिन मैं इससे आहत हूं. भारत को औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलना होगा. हमें यह तय करना होगा कि हम खुद को किस नजरिए से देखना चाहते हैं.”
सीतारमण ने सवाल किया कि आज़ादी के 75 साल बाद भी अगर हम पुराने औपनिवेशिक तर्कों को सही मानेंगे, तो यह आत्मनिर्भरता की भावना के खिलाफ होगा.
“Boston Brahmins कहना भी डिवाइड एंड रूल”
सीतारमण ने उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ लोग “Boston Brahmins” जैसे शब्दों को गलत नहीं मानते. लेकिन यह भी उसी ‘डिवाइड एंड रूल’ (Divide & Rule) पॉलिसी का हिस्सा है. इसे ब्रिटिश हुकूमत ने भारत में लागू किया था. उन्होंने कहा, “दोस्त बनकर औपनिवेशिक सोच का समर्थन करने वाले असल में साम्राज्यवादियों के साथी हैं. इस तरह के शब्दों को सामान्य मानना खतरनाक है.” उनके मुताबिक, जब भारत के अंदर ही कुछ लोग इस सोच को सही ठहराते हैं, तो यह औपनिवेशिक ताकतों की ही रणनीति को मजबूत करता है.
औपनिवेशिक सोच से मुक्ति की जरूरत
सीतारमण ने आगे कहा कि आज भारत को आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर पूरी दुनिया गंभीरता से देख रही है. ऐसे समय में देश के भीतर किसी को भी औपनिवेशिक सोच का बचाव नहीं करना चाहिए. उन्होंने कहा, “आत्मनिर्भर भारत तभी सार्थक होगा जब हम आत्मसम्मान को प्राथमिकता देंगे. हमें यह नहीं चाहिए कि कोई हमें समझाए या बताए कि हमें किस तरह जीना चाहिए. हमें हर तरह की औपनिवेशिक सोच से मुक्त होना होगा.”
वित्त मंत्री ने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत ने कभी ‘बांटो और राज करो’ की नीति से भारत को कमजोर किया था. लेकिन आजाद भारत को ऐसी सोच से बाहर निकलना चाहिए. उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि देश अपनी पहचान और सम्मान पर गर्व करे, न कि विदेशी तर्कों का सहारा ले.
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की स्थिति
सीतारमण ने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में आत्मनिर्भरता, नवाचार और विकास के क्षेत्र में कई उपलब्धियां हासिल की हैं. ऐसे में किसी भी तरह की औपनिवेशिक टिप्पणी को स्वीकार करना सही नहीं है. उन्होंने कहा, “आज भारत दुनिया को आत्मनिर्भरता का संदेश दे रहा है. ऐसे वक्त में इस तरह के औपनिवेशिक तर्कों का बचाव करना केवल हमारी अस्मिता को चोट पहुंचाता है.”



