दिल्ली।

यमुना एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के नियम ताक पर, ईंट लदे ट्रैक्टर बन रहे हादसों का कारण

यमुना एक्सप्रेसवे, जिसे तेज़ और सुरक्षित सफर के लिए जाना जाता है, अब धीरे-धीरे लापरवाही और नियमों की अनदेखी का शिकार बनता जा रहा है। हाल के दिनों में एक्सप्रेसवे पर ईंटों से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली की आवाजाही बढ़ गई है, जो ना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यात्रियों की जान के लिए खतरा भी बनता जा रहा है।

एक्सप्रेसवे का निर्माण तेज रफ्तार वाहनों के सुगम आवागमन के लिए किया गया था, जहां भारी और धीमी गति वाले वाहनों की अनुमति नहीं होती। इसके बावजूद कई ट्रैक्टर ट्रॉली, जो ईंट जैसी भारी सामग्री ढोते हैं, रात के अंधेरे या कम भीड़ वाले समय में अवैध रूप से प्रवेश कर जाते हैं। इन वाहनों की गति कम होती है और रिफ्लेक्टर या पीछे चेतावनी संकेत भी अक्सर नदारद रहते हैं, जिससे तेज़ रफ्तार कार या बसों को समय रहते इन्हें देख पाना मुश्किल हो जाता है।

पिछले कुछ महीनों में ऐसे ट्रैक्टरों से टकराने के कई हादसे सामने आए हैं, जिनमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक कार्रवाई न के बराबर दिखती है। जरूरी है कि ट्रैफिक पुलिस और यमुना प्राधिकरण इस ओर सख्त कदम उठाएं। सीसीटीवी की निगरानी, चालान और ऐसे वाहनों की एंट्री पर पूर्ण प्रतिबंध जरूरी हो गया है।

यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह एक्सप्रेसवे दुर्घटनाओं का अड्डा बन सकता है — और इसकी कीमत निर्दोष यात्रियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ सकती है।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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