
नोएडा। आज के प्रतिस्पर्धी युग में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है—मानसिक स्वास्थ्य की समस्या। पढ़ाई, करियर, सोशल मीडिया का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ युवाओं के मनोबल को गहराई से प्रभावित कर रही हैं। बाहरी रूप से मुस्कुराते दिखने वाले कई छात्र भीतर से अवसाद, चिंता और अकेलेपन से जूझ रहे हैं।
हाल के सर्वे के अनुसार, भारत में 60% से अधिक युवा किसी न किसी मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, लेकिन उनमें से केवल 20% ही मदद लेने के लिए आगे आते हैं। इसका प्रमुख कारण है समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर मौजूद डर और गलत धारणाएँ। कॉलेजों में भी मानसिक परामर्श सेवाओं की कमी के कारण छात्र अपनी समस्याओं को साझा नहीं कर पाते।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि युवाओं को मानसिक स्वास्थ्य को शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्व देना चाहिए। नियमित बातचीत, आत्म-अभिव्यक्ति, और आवश्यक होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी है।
समय आ गया है कि हम मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें और युवाओं को यह समझाएँ कि मदद माँगना कमजोरी नहीं, बल्कि एक साहसी कदम है।
रिपोर्ट: जिया कृति



