महाराष्ट्र: OBC आरक्षण पर कानूनी पेंच, क्या कई नगरसेवकों की जा सकती है कुर्सी, जानिए पूरा मामला?

महाराष्ट्र महानगर पालिका चुनाव में OBC आरक्षण की सीमा 50% से अधिक होने पर संकट गहरा गया है. सुप्रीम कोर्ट 21 जनवरी को सुनवाई करेगा, और यदि फैसला प्रतिकूल आया तो नागपुर की 40 OBC सीटों सहित कई नगरसेवकों की सदस्यता रद्द हो सकती है.
मुंबई:
हाल ही में महाराष्ट्र में हुए महानगर पालिका चुनाव में ओबीसी (OBC) श्रेणी से निर्वाचित पार्षदों की सदस्यता पर खतरे की तलवार लटक रही है. ओबीसी रिजर्वेशन मामले का संकट पूरे राज्य में हुए महानगर पालिका चुनाव पर छाया है. यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट के अधीन है. 21 जनवरी को सुनवाई है. लेकिन फैसला कब आएगा यह अभी तय नहीं है. फैसले में काफी समय भी लग सकता है.
फैसले का क्या हो सकता है असर?
सुप्रीम कोर्ट का फैसला यदि हक में नहीं आया तो पूरे राज्य में ओबीसी आरक्षित सीटों के तहत चुनकर आए नगरसेवकों की जगह खतरे में होगी. 21 जनवरी का अदालती फैसला न केवल नागपुर की बल्कि समूचे महाराष्ट्र की राजनीति को खासा झटका दे सकता है. यदि आरक्षण रद्द हुआ, तो इन 40 सीटों की श्रेणी बदलकर फिर से उपचुनाव कराने पड़ सकते हैं. अकेले नागपुर में इन सीटों की संख्या 40 है.



