खांसी की सिरप से राजस्थान में चौथी मौत! चुरू के 6 साल के बच्चे की गई जान, जयपुर के चिकित्सक ने दी ये सलाह

राजस्थान में डेक्स्ट्रोमेथार्फन (Dextromethorphan) वाली खांसी की सिरप से बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. ताजा मामला चुरू जिले से जुड़ा है, जहां 6 साल के मासूम अनस खान की शनिवार को जयपुर के जेके लोन अस्पताल में मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि बुधवार को घर पर दी गई इसी सिरप के सेवन के बाद अनस की तबीयत बिगड़ गई, जिससे उसे चुरू के अस्पताल में भर्ती कराया गया. गंभीर हालत में रेफर किए गए अनस ने सुबह 4 बजे अस्पताल पहुंचने के महज 6 घंटे बाद दम तोड़ दिया.
अनस के पिता यासीन खान ने बताया ने बताया कि बच्चे को 25 सितंबर से हल्की खांसी और बुखार था. डॉक्टर की सलाह पर हमने डेक्स्ट्रोमेथार्फन हाइड्रोब्रोमाइड वाली सिरप दी, लेकिन उसके बाद हालत तेजी से बिगड़ गई. हमारा बच्चा चला गया, दोषी को सजा मिलनी चाहिए. अस्पताल के अधिकारियों ने मौत का कारण ‘एक्यूट ब्रेन फीवर’ बताया है, लेकिन परिजन सिरप को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.
राजस्थान में अब तक 4 मौतें
इस घटना के साथ ही राजस्थान में इस जहरीली सिरप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 4 हो गई है. ये सिरप मुख्य रूप से मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर उपलब्ध कराई जा रही थी. अब तक सीकर में एक, चुरू में एक और भरतपुर में दो मौतें हो चुकी है. इसके अलावा, सीकर, भरतपुर, बांसवाड़ा, जोधपुर और जयपुर में 10 से अधिक बच्चे और एक डॉक्टर इस सिरप से बीमार पड़े. बांसवाड़ा में 7 बच्चों को ओवरडोज जैसे लक्षणों के साथ महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया. एक डॉक्टर ने सिरप की ‘सुरक्षा’ साबित करने के लिए खुद डोज ली, लेकिन 8 घंटे बाद बेहोश हो गया.
सिरप की सप्लाई पर सरकार ने लगाई रोक
राजस्थान सरकार ने डेक्स्ट्रोमेथार्फन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप (बैच KL-25/147 और KL-25/148) की पूरी सप्लाई पर रोक लगा दी है. जयपुर स्थित केसन्स फार्मा की 19 दवाओं का वितरण निलंबित कर दिया गया है. वहीं ड्रग कंट्रोलर राजाराम शर्मा को निलंबित किया गया. वहीं सीकर में सिरप देने वाले डॉक्टर और फार्मासिस्ट निलंबित कर दिए गए. तीन सदस्यीय कमेटी गठित की गई है जो सैंपल जांच कर रही है. राज्य औषधि परीक्षण लैब ने कुछ बैचों को ‘सुरक्षित’ बताया, लेकिन केंद्र सरकार ने 2 साल से कम उम्र के बच्चों को सिरप न देने की सलाह दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि डेक्स्ट्रोमेथार्फन सिरप 4 साल से कम उम्र के बच्चों को न दें. NCDC ने भी पानी, कीटविज्ञान और दवा के सैंपल लिए.
बच्चों को सिरप की बजाय भाप या शहद दें
चिकित्सकों के मुताबिक डेक्स्ट्रोमेथार्फन (DM) खांसी दबाने वाली दवा है, लेकिन बच्चों में ज्यादा डोज से सांस रुकना, मतिभ्रम या किडनी फेल हो सकती है. 2021 में केंद्र ने 2 साल से कम उम्र पर बैन लगाया था. जयपुर मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि बच्चों को सिरप की बजाय भाप या शहद दें. सरकारी दवाओं की क्वालिटी चेक जरूर करें. अधिक जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन 104 पर संपर्क कर सकते हैं. यह संकट सिर्फ राजस्थान तक सीमित नहीं है. मध्य प्रदेश में भी बच्चों की मौत इसी तरह की सिरप से हुई है. जांच में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहर मिले, जो ब्रेक ऑयल में इस्तेमाल होता है.



