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भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान कौन उड़ा सकता है? ट्रेनिंग कैसे होती है और सैलरी कितनी मिलती है?

शुक्रवार को दुबई एयरशो के दौरान भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस (LCA) से जुड़ी दुखद खबर ने राष्ट्र को स्तब्ध कर दिया. इस हादसे में विंग कमांडर नमांश स्याल के निधन से देश ने एक बहादुर योद्धा खो दिया, जो दुनिया के सामने भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहे थे. फाइटर पायलट का जीवन बहुत जोखिम और समर्पण से भरा होता है. फाइटर पायलट की ट्रेनिंग से ही कठनाइयों का सफर शुरू हो जाता है.

तेजस जैसे फाइटर जेट को आसमान की ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए केवल स्किल्स नहीं, बल्कि अदम्य साहस की भी जरूरत होती है. भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट उड़ाने वाले पायलट पर देश की सुरक्षा का जिम्मा होता है. इन गगनवीरों को भारतीय वायुसेना में शामिल करने के लिए कई तरह के नियम-कायदे निर्धारित किए गए हैं. चयन प्रक्रिया से लेकर ट्रेनिंग तक इन गाइडलाइंस को मानना अनिवार्य है. अगर आप भी भारतीय वायुसेना में पायलट बनना चाहते हैं तो जानिए इससे जुड़ी हर डिटेल

भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान कौन उड़ा सकता है?

तेजस जैसे उच्च-प्रदर्शन वाले लड़ाकू विमानों को केवल भारतीय वायुसेना (IAF) के विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारी ही उड़ाते हैं. ये अधिकारी IAF की फाइटर स्ट्रीम से संबंधित होते हैं.

योग्यता: तेजस पायलट वायुसेना के सबसे बेहतरीन और अनुभवी फ्लाइंग अधिकारियों में से होते हैं. उन्हें एयरोनॉटिक्स में गहन तकनीकी ज्ञान और हवा में मुश्किल से मुश्किल करतब दिखाने में माहिर होना पड़ता है.

भूमिका: तेजस पायलट का मुख्य काम हवाई युद्ध, जमीन पर हमला, टोही मिशन और देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा करना होता है.

वायुसेना में फाइटर पायलट कैसे बनते हैं?

फाइटर पायलट बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन है, जिसके 3 प्रमुख रास्ते हैं:

राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA): 12वीं (PCM अनिवार्य) के बाद एनडीए प्रवेश परीक्षा पास करके उम्मीदवार तीन साल की कठिन ट्रेनिंग लेते हैं. फिर वायुसेना एकेडमी में एक साल की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करते हैं.

संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDSE): ग्रेजुएशन के बाद इस परीक्षा को पास करने वाले उम्मीदवार वायुसेना अकादमी में 74 हफ्ते की फ्लाइंग ट्रेनिंग करते हैं.

एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT): ग्रेजुएट्स इस परीक्षा को पास करके भी फ्लाइंग ब्रांच में एंट्री कर सकते हैं, जिसके बाद उन्हें वायुसेना अकादमी में ट्रेनिंग दी जाती है.

इन सभी प्रक्रियाओं में सफल होने के बाद उम्मीदवार को कठोर शारीरिक और मानसिक फिटनेस टेस्ट और पायलट एप्टीट्यूड बैटरी टेस्ट (PABT) पास करना होता है. एक बार कमीशन मिलने के बाद अधिकारियों को फाइटर प्लेन उड़ाने के लिए एक्सपर्ट ट्रेनिंग दी जाती है.

फाइटर पायलट की सैलरी और अन्य लाभ

भारतीय वायुसेना के पायलट को उनके पद और सेवाकाल के आधार पर बेहतरीन सैलरी और भत्ते मिलते हैं.

शुरुआती सैलरी (फ्लाइंग ऑफिसर): एक फाइटर पायलट की शुरुआती सैलरी (मूल वेतन, मिलिट्री सर्विस पे, फ्लाइंग पे और अन्य भत्ते) ₹1 लाख प्रति माह या उससे अधिक हो सकती है.

फ्लाइंग पे: फ्लाइंग ड्यूटी में शामिल होने के कारण उन्हें विशेष ‘फ्लाइंग पे’ मिलता है, जो उनके कुल वेतन का एक बड़ा हिस्सा होता है.

उच्च रैंक पर सैलरी: विंग कमांडर या ग्रुप कैप्टन जैसे उच्च पदों पर सैलरी ₹2 लाख से ₹3 लाख प्रति माह या उससे भी अधिक हो सकती है.

अन्य लाभ: इसके अलावा मुफ्त आवास, चिकित्सा सुविधा, पेंशन और बच्चों की शिक्षा जैसे कई अन्य लाभ भी मिलते हैं.

यह करियर सिर्फ पैसे का नहीं, बल्कि देश की सेवा और आसमान में उड़ान भरने के जुनून का प्रतीक है.

saamyikhans

former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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