भगवान कृष्ण और गीता की कसम खाकर तेज प्रताप यादव ने कौन सी ‘भीष्म प्रतिज्ञा’ कर ली?

हम गीता और कृष्ण भगवान का कसम खाते हैं कि अब कभी आरजेडी में नहीं जाएंगे”. तेज प्रताप यादव ने एक निजी टीवी चैनल से बातचीत में यह साफ कर दिया है कि अब चाहे कितनी भी बार बुलाया जाए वह आरजेडी में वापसी नहीं करेंगे. तेजप्रताप यादव ने आरजेडी में वापसी के सभी अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि वह अपने फैसले पर कायम हैं और कायम रहेंगे. उन्होंने गीता और कृष्ण भगवान की कसम खाकर कहा कि उनका मन पूरी तरह साफ है. महुआ विधानसभा से चुनाव लड़ने का एलान करते हुए तेजप्रताप ने कहा कि वे अपने दम पर राजनीतिक सफर तय करेंगे. परिवार से उनके रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन राजनैतिक तौर पर उन्होंने नया रास्ता चुना है और इसपर आगे चलेंगे.
परिवार और राजनीति का अलग नजरिया
तेज प्रताप ने अपने बयान में परिवार के प्रति प्रेम और सम्मान भी जताया. उन्होंने कहा, माता-पिता हमारे भगवान हैं और उनका सम्मान करते हैं और तस्वीर हम दिल में रखते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि राजनीति और परिवार के रिश्ते अलग हैं और यह हमेशा उनके दिल में रहेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी राजनीतिक राह अब अलग होगी.
महुआ से लड़ेंगे, बहनों को भी दिया ऑफर
तेज प्रताप ने महुआ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. उन्होंने यह संकेत है कि वे अब अपनी नई पार्टी के दम पर राजनीतिक सफर तय करेंगे. तेज प्रताप ने अपनी बहनों को आरजेडी में शामिल होने का ऑफर दिया है कि वह उनके साथ आना चाहें तो आ जाएं. तेज प्रताप ने कहा कि उनकी बहनें अगर साथ आएंगीं तो वह अपनी पार्टी से टिकट भी देंगे.
सियासी स्वतंत्रता और अलग पहचान की चाहत
राजनीति के जानकारों की नजर में तेज प्रताप यादव ने अपना जो रुख दिखाया है यह बिहार की राजनीतिक तस्वीर को और भी दिलचस्प बनाने जा रहा है, क्योंकि तेज प्रताप अब आरजेडी के बिना अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं. यह दिखाता है कि उनके बीच व्यक्तिगत संबंध तो हैं, लेकिन राजनीतिक फैसलों में उन्होंने अपनी स्वतंत्रता और अलग पहचान को प्राथमिकता दी है.
नई राजनीतिक राह पर चलने को तैयार तेज प्रताप
राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि तेजप्रताप यादव के इस फैसले में परिवार में राजनीतिक मतभेदों के बावजूद रिश्ता कायम रखने की इच्छा झलकती है, लेकिन वह राजनीति में अपनी लकीर खींचना चाहते हैं. जाहिर है अब जब तेज प्रताप ने साफ कर दिया है कि वे अब अपनी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे तो उनका यह फैसला बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म देगा.
बदल जाएगा बिहार का राजनीतिक परिदृश्य!
जानकार कहते हैं कि तेज प्रताप की नई राह का प्रभाव आगामी विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा. तेज प्रताप का यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं है, बल्कि बिहार के राजनीतिक परिदृश्य में बड़े बदलाव का संकेत कहा जा सकता है. उनकी अलग राह, नए गठबंधन और नए उम्मीदवारों की भूमिका पर असर डाल सकती है जो राजद के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है.



