
राजनीति में परिवारवाद कोई नई बात नहीं है, लेकिन बिहार की राजनीति में एक बार फिर इसी को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने इस बार अपने परिवार से जुड़े एक और सदस्य को चुनावी मैदान में उतारा है—तेज प्रताप यादव की साली करिश्मा।
करिश्मा, जो पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की बड़ी बहू ऐश्वर्या राय की बहन हैं, अब सियासी मंच पर कदम रख चुकी हैं। आरजेडी ने उन्हें हाल ही में विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है।
इस फैसले को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। एक तरफ इसे परिवारवाद का विस्तार कहा जा रहा है, तो वहीं दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि लालू यादव युवा चेहरों को आगे लाकर पार्टी को नई ऊर्जा देना चाहते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि करिश्मा का नाम हाल ही में चुनाव आयोग से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं में भी सामने आया है, जिससे उनके नामांकन को लेकर कुछ विवाद भी खड़े हुए। हालांकि, अब तक किसी तरह की गंभीर आपत्ति की पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि करिश्मा का मैदान में आना आरजेडी के पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत कर सकता है, खासकर महिला वोटरों के बीच। लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वह सिर्फ परिवार की विरासत के सहारे जीत दर्ज कर पाएंगी, या फिर अपनी खुद की पहचान बना पाएंगी।
राजनीति में उतरना एक बात है, लेकिन खुद को साबित करना एक और बड़ी चुनौती होगी—और करिश्मा अब उसी रास्ते पर हैं।



