Lucknow News: हड्डी के कैंसर से पीड़ित युवक को कलाई से दी गई कीमोथेरेपी

किग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में डॉक्टरों ने हड्डी के कैंसर से पीड़ित युवक को कलाई के माध्यम से कीमोथेरेपी देकर उसका हाथ बचाने में सफलता हासिल की है। इस तकनीक को कीमोएंबोलाइजेशन कहा जाता है।
केजीएमयू में रेडियोडाग्यनोसिस विभाग के प्रमुख प्रो.अनित परिहार ने बताया कि इस 18 वर्षीय युवक को कंधे में हड्डी कैंसर की समस्या थी। यह ट्यूमर कंधे के जोड़ तक फैल चुका था। इसमें सर्जरी ही एकमात्र विकल्प था, लेकिन इसमें बहुत ज्यादा खून बहने और स्थायी अक्षमता का खतरा था। इसका देखते हुए मेडिकल आंकोलॉजी विभाग की डॉ. ईशा जफा की सलाह पर डॉ. सौरभ कुमार ने उसे कलाई में कीमोएंबोलाइजेशन यानी कैथेटर डालकर कीमोथेरेपी देने का फैसला किया। इस प्रक्रिया में ट्यूमर को रक्त आपूर्ति करने वाली धमनियों में सीधे कीमोथेरेपी दवा दी जाती है और बाद में उन धमनियों को अवरुद्ध कर ट्यूमर की रक्त आपूर्ति बंद कर दी जाती है। इस तरह से ट्यूमर पनप नहीं पाता है। इस उपचार में प्रो. मनोज कुमार, डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा, डॉ. नितिन अरुण दीक्षित एवं डॉ. सूर्य प्रताप सिंह की भी सक्रिय भूमिका रही। प्रो. अनित परिहार ने बताया कि कीमोएंबोलाइजेशन में ट्यूमर में सीधे उच्च मात्रा में दवा पहुंचाई जा सकती है, जिससे शरीर के अन्य अंगों पर दुष्प्रभाव कम होते हैं, दर्द में राहत मिलती है और आगे की सर्जरी अधिक सुरक्षित हो जाती है। राहत के बाद अब युवक का इलाज किया जा रहा है। केजीएमयू कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी एवं मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की पूरी टीम को इसके लिए बधाई दी है।



