पैसे होने के बावजूद लोग नहीं बनाते थे घर, CM नीतीश ने 2005 से पहले बिहार की स्थिति को लेकर विपक्ष को लिया आड़े हाथों…

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी क्षेत्रों में जुबानी वार पलटवार के साथ ही सोशल मीडिया पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर काफी तेज है। एक तरफ विपक्ष के नेता लालू यादव और तेजस्वी यादव बीच बीच में सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से राज्य एवं केंद्र की NDA सरकार पर निशाना साधते रहते हैं तो दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के नेता भी जवाब देते रहते हैं। अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सोशल मीडिया के जरिये विपक्ष पर तीखा प्रहार किया है। सीएम नीतीश ने सोशल पर पोस्ट कर लालू-राबड़ी के कार्यकाल की याद दिलाते हुए उस वक्त बिहार में अपराध की स्थिति बताई है। सीएम नीतीश ने विपक्ष पर अपराधियों को संरक्षण के साथ ही शोरूम से गाड़ी लूटने, हत्या अपहरण का भी जिक्र किया है और लिखा है कि हमारी सरकार आने पर राज्य में कानून व्यवस्था ठीक हुई है।
सीएम नीतीश ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा है कि ‘2005 से पहले का दौर आप सब को याद होगा, जब बिहार में अपराध और भ्रष्टाचार चरम पर था। हर तरफ अराजकता का माहौल था। लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया था। शाम 6 बजे के बाद लोग अपने घरों से बाहर नहीं निकल पाते थे। हमारी बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। राज्य में अपहरण का धंधा उद्योग का रूप धारण कर चुका था। शोरूम से दिनदहाड़े गाड़ियां लूट ली जाती थीं। अपराधियों के भय से कोई नई गाड़ी नहीं खरीदना चाहता था। पैसा रहते हुए भी कोई नया मकान नहीं बनाना चाहता था। राज्य में रंगदारों के आतंक की वजह से उद्योग धंधे बंद हो चुके थे। राज्य से डॉक्टर-इंजीनियर पलायन कर रहे थे। पूरी व्यवस्था चरमरा गई थी।
बिहार में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं रह गई थी। अपराध को सत्ता से सीधे संरक्षण मिल रहा था और सत्ता में बैठे लोगों ने शासन-प्रशासन को पूरी तरह से पंगु बना कर रख दिया था। राज्य की जनता डर के साए में जीवन व्यतीत करने को मजबूर थी। बिहारी कहलाना अपमान की बात थी। वर्ष 2005 में जब हमलोगों की सरकार बनी, तो हमने सबसे पहले विधि-व्यवस्था के संधारण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कानून का राज स्थापित किया। अपराध और भ्रष्टाचार के मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी गई। अब राज्य में किसी प्रकार के डर एवं भय का वातावरण नहीं है। राज्य में प्रेम, भाईचारे और शांति का माहौल है। पहले पुलिस के पास न तो गाड़ियां होती थीं और न हथियार। अत्याधुनिक हथियारों के अभाव में पुलिस का मनोबल काफी नीचे था। वर्ष 2005 में बिहार में थानों की संख्या सिर्फ 817 थी, जिसे बढ़ाकर अब 1380 से भी ज्यादा कर दिया गया है। पुलिस थानों के लिए अत्याधुनिक भवन बनाए गए। साथ ही, पुलिस वाहनों की संख्या कई गुणा बढ़ाई गयी। पुलिस प्रशासन को अत्याधुनिक हथियारों से लैस किया गया।



