पुराने अंदाज में लौटी बसपा, चुपचाप चल रही तैयारी, पंचायत चुनाव के लिए मायावती ने की तगड़ी प्लानिंग!

उत्तर प्रदेश के आगामी पंचायत चुनाव 2025 को लेकर बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीति को और मजबूत करते हुए एक तगड़ा प्लान तैयार किया है. पार्टी अपने मूल वोट बैंक, विशेष रूप से दलित समुदाय, के साथ-साथ पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय को जोड़ने की दिशा में बड़े पैमाने पर काम कर रही है. बसपा का लक्ष्य इस बार पंचायत चुनाव में अपने पुराने रंग में लौटना और ग्रामीण स्तर पर अपनी पकड़ को मजबूत करना है.
सूत्रों के अनुसार, बसपा इस बार पंचायत चुनाव में सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन कर रही है. पार्टी ने पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय के नेताओं को बड़ी संख्या में टिकट देने का फैसला किया है. मायावती की यह रणनीति 2007 के विधानसभा चुनावों में अपनाई गई उनकी सफल ‘सामाजिक इंजीनियरिंग’ की रणनीति की याद दिलाती है, जब दलित-ब्राह्मण-मुस्लिम गठजोड़ ने बसपा को सत्ता तक पहुँचाया था. इस बार भी मायावती इसी फॉर्मूले को ग्रामीण स्तर पर लागू करने की कोशिश कर रही हैं.
बूथ स्तर पर सक्रियता, चुपचाप चल रहा अभियान
बसपा ने इस बार अपनी तैयारियों को गोपनीय और व्यवस्थित तरीके से अंजाम देने की रणनीति अपनाई है. पार्टी के नेता और कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर बूथ स्तर पर बैठकें कर रहे हैं. इन बैठकों में न केवल दलित वोटरों को एकजुट करने पर जोर दिया जा रहा है, बल्कि पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम समुदाय के लोगों को भी पार्टी के साथ जोड़ा जा रहा है. सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, बसपा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी-छोटी सभाएं आयोजित कर रहे हैं, जिनमें मायावती के नेतृत्व और बसपा की नीतियों को जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है.
पुराने अंदाज में बसपा की वापसी
पिछले कुछ वर्षों में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मिली हार के बाद मायावती ने इस बार पंचायत चुनाव को अपनी राजनीतिक ताकत को पुनर्जनन करने के अवसर के रूप में देखा है. पार्टी ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए स्थानीय स्तर पर नेताओं को सक्रिय करने और नए चेहरों को मौका देने का फैसला किया है. मायावती का मानना है कि पंचायत चुनाव में मजबूत प्रदर्शन न केवल बसपा की ग्रामीण क्षेत्रों में पकड़ को मजबूत करेगा, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा.
सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर जोर
मायावती ने हाल के दिनों में कई बार यह दोहराया है कि बसपा का मुख्य एजेंडा सामाजिक न्याय और सभी वर्गों का समावेशी विकास है. पंचायत चुनाव के लिए उनकी रणनीति में भी यह स्पष्ट झलक रहा है. पार्टी ने यह सुनिश्चित करने की योजना बनाई है कि टिकट वितरण में सभी प्रमुख समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व मिले. खास तौर पर, मुस्लिम और पिछड़ा वर्ग के नेताओं को ग्राम प्रधान, जिला पंचायत और ब्लॉक स्तर के पदों के लिए उम्मीदवार बनाया जा रहा है.
चुनौतियां और अवसर
हालांकि, बसपा के सामने कई चुनौतियां भी हैं. पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का वोट शेयर कम हुआ है, और कई प्रमुख नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है. इसके बावजूद, मायावती की जाटव और दलित समुदाय में मजबूत पकड़ अभी भी बरकरार है. सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने बसपा की इस रणनीति की तारीफ करते हुए कहा कि मायावती का यह कदम ग्रामीण स्तर पर पार्टी को फिर से मजबूत कर सकता है. पंचायत चुनाव में बसपा की यह रणनीति कितनी सफल होगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन मायावती का पुराना अंदाज और उनकी सामाजिक इंजीनियरिंग की रणनीति एक बार फिर चर्चा में है. पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार बसपा न केवल अपने मूल वोट बैंक को मजबूत करेगी, बल्कि नए समुदायों को जोड़कर एक व्यापक गठजोड़ तैयार करेगी.



