पीएम मोदी और ट्रंप की दोस्ती में किसने घोला जहर; US के पूर्व NSA की नजर में कौन है विलेन?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वार के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों में सब कुछ सहज नहीं है. इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने एक चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दोस्ती में जहर घोलने की कोशिश की थी. बोल्टन ने इसे एक साइडशो करार देते हुए कहा कि भारत को सोशल मीडिया पर धमकियों और चीख-पुकार से दूर रहना चाहिए और वास्तविक व्यापार वार्ताकारों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि यह एक ऐसी बैठक थी जहां मैंने उम्मीद की थी कि दोनों नेता चीन से निपटने जैसे रणनीतिक मुद्दों पर बात करेंगे. चीन एक ऐसा मुद्दा है जिसका सामना हम सब कर रहे हैं और यह इस सदी के सबसे बड़े खतरों में से एक है. लेकिन नवारो ने भारतीय व्यापार प्रथाओं को अनुचित बताते हुए विवाद पैदा करने की कोशिश की. बोल्टन ने नवारो पर तंज कसते हुए कहा- अगर आप पीटर को एक कमरे में अकेला छोड़ दें और एक घंटे बाद लौटें, तो वह खुद से ही बहस कर रहे होंगे. उन्होंने जोर देकर कहा कि व्यापार मुद्दों में हमेशा शिकायतें होती हैं, लेकिन भारत-अमेरिका के बीच इस सदी में कई सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि वह व्यापार के महत्व को कम नहीं आंक रहे, लेकिन इसे संतुलन में रखें.
50 फीसदी टैरिफ
दरअलस, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए हैं, जिसमें 25 प्रतिशत की मूल टैरिफ और 25 प्रतिशत की अतिरिक्त पेनाल्टी शामिल है. नवारो ने भारत को टैरिफ महाराजा कहा है और रूसी तेल की खरीद को ब्लड मनी करार दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत व्यापार वार्ता में समझौता नहीं करता, तो इसका अच्छा अंत नहीं होगा. टैरिफ वार और व्यापार वार्ता का टूटना ट्रंप और मोदी के बीच दो दशकों की मजबूत संबंधों को झटका दिया है. बोल्टन ने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों को विदेशी नेताओं से व्यक्तिगत संबंधों के चश्मे से देखते हैं. ट्रंप के नजरिए से अगर वह और मोदी का व्यक्तिगत संबंध अच्छा है, तो सब ठीक है.
हाल ही में दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर सकारात्मक संदेशों का आदान-प्रदान हुआ, जो संबंधों में सुधार का संकेत देता है. हालांकि, बोल्टन ने चेताया कि ट्रंप के साथ निजी संबंध कुछ बुरा होने से बचने की गारंटी नहीं देते. चीन के संदर्भ में बोल्टन ने कहा कि नई दिल्ली को भावनाओं के बजाय वास्तविकता पर ध्यान देना चाहिए. क्या आपको लगता है कि चीन ने अपनी हेक्टोरिक महत्वाकांक्षाओं को बदल लिया है? नहीं. उन्होंने सुझाव दिया कि वाशिंगटन और नई दिल्ली को गोपनीय तरीके से इन मुद्दों को सुलझाना चाहिए.
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की नीतियां भारत को रूस और चीन के करीब धकेल रही हैं, जो शीत युद्ध काल के बाद की रणनीतिक उपलब्धियों को नुकसान पहुंचा रही हैं. बोल्टन ने कहा कि ये मुद्दे आसान या जल्दी हल नहीं होंगे, लेकिन कोशिश करने पर सकारात्मक नतीजे जरूर आएंगे.



