पाकिस्तान का तो समझ आ गया, पर सऊदी अरब डिफेंस डील को क्यों हुआ मजबूर? इनसाइड स्टोरी

पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच डिफेंस डील हुई है. पाकिस्तान और सऊदी अरब ने NATO देशों जैसा ही समझौता किया है. इस डील का मतलब है एक पर हमला देशों पर हमला माना जाएगा. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को इस डिफेंस डील पर मुहर लगाई. इस डिफेंस डील ने मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया के जियोपॉलिटिक्स में हलचल पैदा कर दी है. इस समझौते को ऐसा समझा जा सकता है कि अगर पाकिस्तान पर हमला होगा तो सऊदी उसका साथ देगा और सऊदी अरब पर हमला होगा तो पाकिस्तान उसका साथ देगा.यानी युद्ध या आक्रमण की स्थिति में दोनों देश एक-दूसरे का सहयोग करेंगे. अब सवाल उठता है कि पाकिस्तान की मजबूरी तो भारत से सीमा तनाव है, मगर सऊदी अरब आखिर इस डील के लिए क्यों मजबूर हुआ? वह भी तब जब सऊदी खुद अमेरिका का पुराना सहयोगी है और तेल वाला अमीर देश है. चलिए जानते हैं इस डील की इनसाइड स्टोरी.
डिफेंस डील में पाकिस्तान का इंट्रेस्ट तो जगजाहिर है. पाकिस्तान ने यह डिफेंस डील क्यों की है, यह बच्चा-बच्चा समझ सकता है. उसे हर पल भारत का खतरा सताता रहता है. ऑपरेशन सिंदूर से तो वह अब तक खौफजदा है. वैसे भी भारत बार-बार कह रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है. दरअसल, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम अटैक हुआ. आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया. इसमें पाकिस्तान और उसके आतंकियों की कब्र खुद गई. भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसे हालात हो गए. भारत के ब्रह्मोस से इस कदर पाक डरा कि उसने सीजफायर की गुहार लगा दी.उसी ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए मजबूत सहयोगी की तलाश में झोंक दिया. जी हां, पाकिस्तान ने अपने फायदे के लिए सऊदी अरब से यह डील की है, ताकि भारत जब उसके ऊपर हमला करे तो उसकी हिफाजत सऊदी अरब से हो सके.
सऊदी की क्या मजबूरी?
दरअसल, परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान लंबे समय से सऊदी का सैन्य साझेदार रहा है. सऊदी अरब ने पाकिस्तान को आर्थिक सहायता प्रदान की है. साफ-साफ कहें तो पाकिस्तान ने यह डील केवल भारत से बचने के लिए की है. मगर सऊदी अरब की ओर से यह डील मजबूरी के साथ-साथ सोची-समझी चाल है. सूत्रों का कहना है कि सऊदी अरब को अब पहले की तरह अमेरिका पर भरोसा नहीं है. कहा जाता है कि यह समझौता अमेरिका की ‘धोखेबाजी’ का नतीजा है. अमेरिका शुरू से चाहता है कि सऊदी अरब इजरायल संग अपने रिश्ते सामान्य करे. सऊदी को अब अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर यकीन नहीं.
पांच प्वाइंट में जानिए डिफेंस डील के पीछे सऊदी अरब की मजबूरी
जिस तरह इजरायल ने कतर की राजधानी दोहा में हमला किया, इसने भी सऊदी अरब की चिंता को और बढ़ा दिया. जी हां, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच यह रणनीतिक रक्षा समझौता पड़ोसी कतर की राजधानी दोहा में हुए हमले के ठीक बाद हुआ है. इजरायल ने दोहा में हमास नेताओं पर हमला किया था. हालांकि, दोहा में हुए हवाई हमले की अमेरिका ने निंदा की, मगर कोई ठोस कदम नहीं उठाया. इसलिए सऊदी को हमेशा यह डर सता रहा है कि इजरायल कहीं सऊदी तक न अपनी नजर बढ़ा ले. वैसे भी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गाजा युद्ध को ‘नरसंहार’ करार दिया था. सऊदी ने अक्सर इजरायल की आलोचना की है.



