गोंडा

पौराणिक स्थल महार्षि च्वन श्रृषि तपोस्थली पर लगा भाव्य मेला श्रद्धा आस्था का उमड़ा जनसैलाब

*गोण्डा*

गोंडा जनपद के विकास खण्ड पंडरी कृपाल के सुभागपुर में स्थित महर्षि च्यवन मुनि की तपोस्थली प्रसिद्ध धार्मिक स्थल का उल्लेख श्रीमद् भागवत गीता जैसे पवित्र ग्रंथ में वर्णित है जहा आज मंगलवार को ऐतिहासिक

महर्षि च्यवन मुनि ने इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी और उन्हें च्यवनप्राश नामक औषधि की उत्पत्ति का श्रेय दिया जाता है। उनकी तपस्या और जीवन से जुड़ी कथाएं इस प्रकार हैं

उनका जन्म भृगु ऋषि और पुलोमा के घर हुआ था। उनका बिबाह-अयौध्या के राजा शर्याति की पुत्री सुकन्या से हुआ बताया जाता है सुकन्या यहां भ्रमण करने आयी थी मुनि तप कर रहे थे उनकी शरीर में दीमकों ने घेर रखा था सुकन्या उधर गयी। मिट्टी भीठ दिखी लेकिन उसमें कुछ चमकदार रोशनी दिखी उत्सुकता बस सुकन्या ने चमकते स्थान को कुरेद दिया उसमें से खून निकलने लगा मुनि पीडा बेदना से कराहते हुए तड़पने लगे । सुकन्या डर गयी और क्षमा यचना मांगते हुए कहा मैंने आपको नेत्रहीन किया जिसका प्रायश्चित के लिए मैं आप से बिबाह कर पत्नी बन कर सेवा करूंगी। बिबाह के बाद देव बैद्य

अश्विन, कुमारों ने उन्हें च्यवनप्राश नामक औषधि दी, जिससे वे पुनः युवा हो गए। , मान्यता है यहां स्नान करने से कुष्ठ रोग जैसे चर्म रोग ठीक हो जाते हैं

श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने स्नान दान कर पूण्य अर्जित किया लोग ने बैतरणी के लिए गौदान किया । मेले में झूला सर्कस मिष्ठान का बच्चों बुजुर्गो महिलाओं ने लिया आनन्द।।

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former crime reporter DAINIK JAGRAN 2001 and Special Correspondent SWATANTRA BHARAT Gorakhpur. Chief Editor SAAMYIK HANS Hindi News Paper/news portal/

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