धर्म-कर्म
करवा चौथ का पर्व: महिलाओं का अटूट विश्वास और पौराणिक महत्व

करवा चौथ का व्रत हर वर्ष कार्तिक मास की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की दीर्घायु और समृद्धि के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएँ सुबह से बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत तोड़ती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत की शुरुआत माता पार्वती ने भगवान शिव के कहने पर की थी। महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है, जहाँ द्रौपदी ने पांडवों के संकट निवारण के लिए यह व्रत रखा था। आज के समय में यह व्रत सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक उत्सव भी बन गया है। महिलाएँ सज-संवर कर पूजा करती हैं, मेहंदी लगाती हैं और चंद्र दर्शन के साथ पति की लंबी उम्र की कामना करती हैं।



