जस्टिस सूर्यकांत ने सम्हाला CJI का पद, 15 महीने तक चलेंगे मुख्य न्यायालय के सर्वोच्च पद पर

नई दिल्ली: जस्टिस सूर्यकांत आज देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) पद की शपथ ग्रहण कर चुके हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुबह 10 बजे उन्हें इस पद पर नियुक्त किया। उनका कार्यकाल 24 नवंबर 2025 से शुरू होकर 9 फरवरी 2027 तक रहेगा, जो लगभग 15 महीने का होगा। यह पद जस्टिस बी आर गवई की सेवानिवृति के बाद खाली हुआ था, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज को अगला CJI बनाने की परंपरा को कायम रखा।
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने हिसार से 1984 में अपनी लॉ पढ़ाई शुरू की और फिर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस की। इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश भी रहे और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज बने।
अपने संवैधानिक और सेवा मामलों के फैसलों के लिए पहचाने जाने वाले जस्टिस सूर्यकांत ने कई महत्वपूर्ण मामलों में इतिहास रच दिया है। उन्होंने वन रैंक-वन पेंशन योजना पर फैसला दिया, जो सेवा निवृत्त सैनिकों के लिए एक क्रांतिकारी आदेश माना जाता है। इसके अलावा, वे उस पीठ के सदस्य थे जिसने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म किया था, यानी अनुच्छेद 370 को निरस्त किया। उन्होंने बिहार मतदाता सूची संशोधन के मामले में चुनाव आयोग को पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश भी दिए।
उनके अन्य अहम फैसलों में पेगासस स्पाइवेयर जांच की संवैधानिक मान्यता, न्यायपालिका में लंबित मामलों की तेजी से निपटान, और अनुसूचित जाति आरक्षण के संबंध में विवादित फैसले शामिल हैं। वे लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि न्यायपालिका निष्पक्ष और स्वतंत्र हो और लोकहित के मामलों को प्राथमिकता मिले।
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल कानून के क्षेत्र में कई नए सुधारों और महत्वपूर्ण फैसलों का अवसर होगा, जिनका देशभर के न्याय व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा।
उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट कई संवैधानिक, सामाजिक और आर्थिक मामलों की सुनवाई करेगा, जो नागरिकों के अधिकार और कर्तव्यों को मजबूत करेंगे।राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के पदाधिकारी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद थे।



