भारतीय बाजार में जल्द आएगी डायबिटीज की नई दवा ! वेट लॉस में भी बेहद कारगर, सप्ताह में लगेगा सिर्फ 1 इंजेक्शन

डायबिटीज और वेट लॉस में इस्तेमाल की जाने वाली मशहूर दवा ओजेम्पिक (Ozempic) जल्द ही भारतीय बाजारों में आ सकती है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने हाल ही में इस दवा के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है. यह दवा भारत में टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए यूज की जाएगी. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो यह दवा इंजेक्शन के जरिए दी जाती है और शुगर लेवल कंट्रोल करने के साथ वेट लॉस में भी कारगर होती है. इस दवा को डेनमार्क की फार्मास्युटिकल कंपनी Novo Nordisk ने बनाया है और कई देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है. भारत में डायबिटीज की समस्या बेहद तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में यह दवा एक महत्वपूर्ण विकल्प साबित हो सकती है.
ओजेम्पिक को सबसे पहले 2017 में अमेरिका और यूरोप में मंजूरी मिली थी. वहां इसे डायबिटीज कंट्रोल के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने लगा. बाद में इसे वेट लॉस ड्रग के तौर पर भी यूज किया जाने लगा. भारत में भी पिछले महीने ड्रग कंट्रोलर ने ओजेम्पिक को टाइप 2 डायबिटीज के लिए मंजूरी दी है. एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि यह दवा भारतीय बाजार में 2025 के अंत तक उपलब्ध हो सकती है. ओजेम्पिक इंजेक्शन के रूप में आती है और इसे सप्ताह में एक बार लगवाया जाता है. शुरू में दवा की कम खुराक दी जाती है और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर टारगेट डोज तक ले जाया जाता है.
कैसे काम करती है ओजेम्पिक दवा?
मेडिकल वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक ओजेम्पिक दवा का मुख्य घटक सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) है. यह एक ग्लूकागन-लाइक पेप्टाइड-1 (GLP-1) रिसेप्टर अगोनिस्ट है, जो शरीर में इंसुलिन रिलीज को बढ़ाता है और ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है. यह भूख भी कम करता है और भोजन की पाचन क्रिया को धीमा करता है, जिससे वजन कम करने में भी मदद मिलती है. ओजेम्पिक को खासतौर पर टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाया गया था. बाद में देखा गया कि यह दवा वजन घटाने में भी काफी मददगार है, इसलिए इसे मोटापे के इलाज में भी यूज किया जाने लगा. हालांकि भारत में फिलहाल इस दवा को केवल डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी मिली है. वेट लॉस के लिए इस दवा को मंजूरी भारत में नहीं दी गई है.
कितने दिन में असर दिखाती है यह दवा?
ओजेम्पिक का असर आमतौर पर दो से चार हफ्तों में ब्लड शुगर लेवल पर दिखाई देने लगता है, जबकि HbA1c में सुधार 3-6 महीने में देखा जाता है. इस दवा को लेने के बाद लोगों के वजन में औसतन 5-10% की कमी देखी गई है. हालांकि यह व्यक्ति की लाइफस्टाइल, खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर भी काफी निर्भर करता है. ओजेम्पिक को दवा के रूप में लेना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके साथ खानपान को लेकर परहेज भी जरूरी होता है.
क्या ओजेम्पिक के साइड इफेक्ट भी हैं?
हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो सभी दवाओं की तरह ओजेम्पिक के भी कुछ साइड इफेक्ट हैं. शुरुआत में इस दवा से मतली, उल्टी, कब्ज या दस्त जैसे पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं. कुछ मामलों में इससे पैनक्रियाटाइटिस, पित्ताशय की समस्या या किडनी पर भी बुरा असर भी हो सकता है. हालांकि डॉक्टर इसे कम डोज से शुरू करते हैं और धीरे-धीरे बढ़ाते हैं, ताकि साइड इफेक्ट कम हो सकें. इस दवा को डॉक्टर्स की निगरानी में ही लेना चाहिए, ताकि साइड इफेक्ट्स से बचा जा सके.
भारत में कितनी होगी ओजेम्पिक की कीमत?
भारत में ओजेम्पिक की कीमत अभी तक आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुई है, लेकिन यह शुरुआती दौर में महंगी हो सकती है, क्योंकि यह पेटेंटेड इंपोर्ट है. मार्च 2026 में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त होने के बाद कई भारतीय दवा कंपनियां इसका जेनेरिक संस्करण लॉन्च करने की तैयारी में हैं, जिससे दवा की कीमतें कम होंगी और ज्यादा लोगों तक पहुंच संभव होगी. ओजेम्पिक भारत के लिए डायबिटीज और मेटाबोलिक रोगों के इलाज में एक नई उम्मीद लेकर आ रही है.



