उडुपी श्री कृष्ण मठ: पीएम मोदी का गीता पाठन संबोधन, वसुधैव कुटुम्बकम से सुदर्शन चक्र तक नया भारत का संकल्प

कर्नाटक के उडुपी में श्री कृष्ण मठ में 27-28 नवंबर 2025 को आयोजित ‘लक्ष कंठ गीता पारायण’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया, जहां एक लाख लोगों ने एक साथ भगवद्गीता के श्लोकों का पाठ किया। उन्होंने वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को अपनाते हुए मिशन सुदर्शन चक्र का जिक्र किया और कहा कि नया भारत किसी के सामने नहीं झुकता। कार्यक्रम में कर्नाटक की राज्यपाल थावर चंद गहलोत और जगद्गुरु श्री सुग्नेंद्र तीर्थ स्वामीजी उपस्थित रहे।
उडुपी श्री कृष्ण मठ की स्थापना 800 साल पहले द्वैत वेदांत के संस्थापक श्री माधवाचार्य ने की थी। पीएम मोदी ने कहा कि उडुपी जनसंघ और भाजपा के शासन मॉडल की कर्मभूमि है, जहां 1968 में वीएस आचार्य को चुना गया था। उन्होंने हाल ही के कुरुक्षेत्र और द्वारकाधीश दर्शन का उल्लेख करते हुए इसे भारत की दिव्यता का साक्षात्कार बताया।
पीएम ने भगवान श्री कृष्ण के श्लोकों को ‘सबका साथ-सबका विकास, सर्वजन हिताय-सर्वजन सुखाय’ नीतियों का आधार बताया। वसुधैव कुटुम्बकम को वैक्सीन मैत्री, सोलर एलाइंस जैसी वैश्विक पहलों से जोड़ा। गीता का संदेश युद्धभूमि पर दिया गया था, जो शांति के लिए अत्याचारियों का अंत आवश्यक बताता है।
पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा कि पुरानी सरकारें चुप रहती थीं, लेकिन नया भारत जीरो टॉलरेंस अपनाता है। राष्ट्र की सुरक्षा नीति वसुधैव कुटुम्बकम और ‘धर्मो रक्षति रक्षितः’ पर आधारित है। लाल किले से मिशन सुदर्शन चक्र की घोषणा इसका उदाहरण है, जो स्वदेशी तकनीक से रणनीतिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
पीएम ने आठ संकल्पों का आह्वान किया, जिसमें जल संरक्षण, ‘एक पेड़ मां के नाम’, प्राकृतिक खेती और नारी सुरक्षा शामिल हैं। उन्होंने दुश्मनों को चेतावनी दी कि नया भारत आत्मनिर्भरता के साथ आगे बढ़ेगा। यह संबोधन भगवद्गीता के 22,000 श्लोकों के पाठ के साथ समापन हुआ।



