अब मेहुल चोकसी की खैर नहीं, भारत ने उठाया ऐसा कदम, बेल्जियम सरकार भी कुछ नहीं बोलेगी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में हजारों करोड़ रुपये के ऋण घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने बेल्जियम सरकार को ठोस आश्वासन दिया है. गृह मंत्रालय ने बेल्जियम के न्याय मंत्रालय को एक पत्र लिखकर चोकसी के मानवाधिकारों की रक्षा और उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए हिरासत की शर्तों का विस्तृत ब्योरा दिया है. यह कदम बेल्जियम में चल रही प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया के बीच उठाया गया है, जहां चोकसी को अप्रैल 2025 में गिरफ्तार किया गया था.
गृह मंत्रालय का बेल्जियम को पत्र
4 सितंबर, 2025 को लिखे गए पत्र में गृह मंत्रालय ने कहा कि अगर मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो उन्हें मुंबई के आर्थर रोड जेल के बैरक नंबर 12 में रखा जाएगा. पत्र में निम्नलिखित आश्वासन दिए गए हैं:
चोकसी को हिरासत में कम से कम 3 वर्ग मीटर की निजी जगह (फर्नीचर को छोड़कर) दी जाएगी.
– उनके सेल में साफ मोटा कपास का गद्दा, तकिया, चादर और कंबल उपलब्ध होगा. अगर चिकित्सकीय जरूरत पड़ी, तो धातु या लकड़ी का बिस्तर भी दिया जा सकता है.
सेल में पर्याप्त रोशनी और हवा का इंतजाम होगा, साथ ही निजी सामान रखने की जगह भी होगी.
– चोकसी को हर दिन साफ पीने का पानी और पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं 24 घंटे उपलब्ध होंगी.
– उन्हें रोजाना साफ शौचालय और नहाने की सुविधा दी जाएगी.
– चोकसी को हर दिन व्यायाम और मनोरंजन के लिए उचित समय के लिए सेल से बाहर निकलने की अनुमति होगी.
– हिरासत के दौरान उन्हें पर्याप्त भोजन प्रदान किया जाएगा.
दरअसल, ये आश्वासन महाराष्ट्र सरकार के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार किए गए हैं, ताकि प्रत्यर्पण प्रक्रिया में बेल्जियम द्वारा उठाए गए मानवाधिकार संबंधी सवालों का जवाब दिया जा सके.
मेहुल चोकसी का PNB घोटाला
मेहुल चोकसी और उनके भतीजे नीरव मोदी पर पीएनबी में 13,500 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण घोटाले का आरोप है. इस घोटाले में दोनों ने कथित तौर पर मुंबई के ब्रैडी हाउस ब्रांच के कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LOU) के जरिए धोखाधड़ी की थी. चोकसी पर इसके अलावा कई अन्य बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में भी जांच चल रही है.
साल 2018 में भारत से भागने के बाद चोकसी एंटीगुआ और बारबुडा में रह रहा था, जहां से वह कथित तौर पर कैंसर के इलाज के लिए बेल्जियम चला गया. अप्रैल 2025 में भारत के औपचारिक अनुरोध पर बेल्जियम पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया.
चोकसी की कानूनी रणनीति
चोकसी के वकील विजय अग्रवाल ने उसकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद अपील करने की घोषणा की है. दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अग्रवाल ने प्रत्यर्पण का विरोध करने की दो मुख्य वजहें बताईं:
राजनीतिक साजिश का दावा: अग्रवाल का कहना है कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और भारत में चोकसी को निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिलेगी.
स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं: चोकसी कथित तौर पर कैंसर का इलाज करा रहे हैं और उनके वकील का दावा है कि भारत में उन्हें उचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिलेंगी.
अग्रवाल ने कहा कि चोकसी को आधिकारिक तौर पर भगोड़ा घोषित नहीं किया गया है और उन्होंने भारतीय जांच एजेंसियों के साथ सहयोग की पेशकश की है. उन्होंने बताया कि चोकसी ने अपनी स्वास्थ्य स्थिति के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होने की इच्छा जताई है. साथ ही, वकील ने 2018 से जारी गैर-जमानती वारंट और डोमिनिका में पहले असफल प्रत्यर्पण प्रयास का जिक्र करते हुए प्रक्रियात्मक खामियों की ओर इशारा किया.
कानूनी आधार और अंतरराष्ट्रीय नियम
भारत ने चोकसी के प्रत्यर्पण के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और खातों में हेराफेरी के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं का हवाला दिया है. ये अपराध बेल्जियम के कानून में भी मान्य हैं, जिसके आधार पर भारत ने प्रत्यर्पण संधि की दोहरी अपराधिता (ड्यूल क्रिमिनैलिटी) की शर्त को लागू किया है.
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध संधि (UNTOC) और भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संधि (UNCAC) का हवाला देकर अपने प्रत्यर्पण अनुरोध को मजबूत किया है.
आगे की प्रक्रिया
चोकसी का प्रत्यर्पण मामला बेल्जियम की अदालतों में विचाराधीन है. उनकी जमानत याचिका को बेल्जियम की अपील कोर्ट ने पहले ही खारिज कर दिया है और अब मध्य सितंबर में प्रत्यर्पण पर सुनवाई होने की उम्मीद है. भारत की जांच एजेंसियां, जिनमें सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ED) शामिल हैं, इस मामले में सक्रिय रूप से बेल्जियम के अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही हैं.
यह मामला न केवल भारत की वित्तीय धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त नीति को दर्शाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़े अपराधियों को न्याय के दायरे में लाने की भारत की प्रतिबद्धता को भी उजागर करता है.



