जिंदा रहने का हक खतरे में’: बांग्लादेश हिंसा पर अखबार संपादकों का गुस्सा, प्रेस फ्रीडम पर चिंता

ढाका: बांग्लादेश में हालिया हिंसा और पत्रकारों पर बढ़ते हमलों के खिलाफ देश के प्रमुख अखबारों के संपादकों ने एकजुट होकर आवाज बुलंद की है। उन्होंने संयुक्त बयान जारी कर कहा, “जिंदा रहने का अधिकार खतरे में है”, और चेतावनी दी कि प्रेस की आजादी पर हमले लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।
संपादकों ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में 10 से ज्यादा पत्रकारों पर हमले हुए हैं, जिनमें पीटाई, धमकियां और संपत्ति पर आगजनी शामिल है। ढाका, चटगांव और सिलहट जैसे शहरों में राजनीतिक हिंसा के बीच पत्रकारों को निशाना बनाया जा रहा है। बांग्लादेश एडिटर्स काउंसिल के चेयरमैन ने कहा, “हम चुप नहीं रहेंगे, यह हमला पूरे समाज पर है।”
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी इसकी निंदा की है। सरकार से मांग की गई है कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। संपादकों ने पाठकों से अपील की कि वे सच्ची खबरों का साथ दें।



